बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत, 540 करोड़ की संपत्ति के मामले में राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को 540 करोड़ रुपये की कथित अनुपातहीन संपत्ति के मामले में ज़मानत दे दी। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

मजीठिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें दिसंबर 2023 में उनकी ज़मानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया को 25 जून 2023 को गिरफ्तार किया था। एफआईआर के अनुसार, मजीठिया ने अपनी आय से अधिक लगभग ₹540 करोड़ की संपत्ति जुटाई है। यह मामला 2021 के एक मादक पदार्थ (ड्रग्स) केस से जुड़ी विशेष जांच टीम (SIT) की जांच के आधार पर दर्ज हुआ।

हाईकोर्ट ने ज़मानत खारिज करते हुए कहा था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, मजीठिया को रिहा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो को तीन महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और कहा था कि उसके बाद मजीठिया दोबारा ज़मानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने दलील दी कि मजीठिया को इससे पहले NDPS एक्ट के तहत दर्ज एक केस में ज़मानत मिल चुकी है और पंजाब सरकार की वह ज़मानत रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

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पीठ ने यह तथ्य ध्यान में रखते हुए कि मजीठिया पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं, उन्हें ज़मानत देने का आदेश दिया।

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