‘सावरकर सदन’ को केंद्र संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह 100 वर्ष पुराना नहीं है: ASI ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि शिवाजी पार्क, दादर स्थित ‘सावरकर सदन’ को केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संरचना केंद्र के अधिनियम के तहत आवश्यक न्यूनतम 100 वर्षों की आयु पूरी नहीं करती।

यह जानकारी एक जनहित याचिका (PIL) पर प्रतिक्रिया में दी गई, जिसमें मांग की गई थी कि हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर का यह आवास “राष्ट्रीय महत्व का स्मारक” घोषित किया जाए।

ASI ने अपने हलफनामे में कहा कि वह केवल उन्हीं स्थलों या स्मारकों का संरक्षण करती है जिन्हें प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया हो और जो 100 वर्ष से अधिक पुराने हों।

हालांकि, एएसआई ने इस भवन को “महत्वपूर्ण इमारत” बताया और इसके संरक्षण के अन्य विकल्पों की ओर इशारा किया। हलफनामे में कहा गया कि ‘सावरकर सदन’ को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की विरासत सूची में शामिल किया जा सकता है या महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया जा सकता है।

इतिहास में दर्ज है कि 1938 में निर्मित यह भवन न केवल वीर सावरकर का निवास स्थान था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों का गवाह भी रहा। वर्ष 1940 में सुभाष चंद्र बोस और 1948 में नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे के साथ हुई चर्चाएं इसी परिसर में हुई थीं।

READ ALSO  घरेलू हिंसा: कथित धमकियों या हस्तक्षेप के आधार पर अदालतें किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ आदेश पारित नहीं कर सकती हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

ASI के अनुसार, मूल रूप से यह इमारत एक ग्राउंड-प्लस-वन मंजिला बंगला थी, जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर तीन और पहले माले पर दो फ्लैट थे।

इस याचिका पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अगुवाई वाली पीठ द्वारा की जाएगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles