दिल्ली सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं करेगी। यह निर्णय निजी स्कूलों की आपत्तियों और शीर्ष अदालत की चिंता के मद्देनज़र लिया गया है, जिसमें कानून को जल्दबाज़ी में लागू करने पर सवाल उठाए गए थे।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराध्य की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दिल्ली सरकार की ओर से 1 फरवरी को जारी राजपत्र अधिसूचना पेश की, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2025-26 के लिए निजी स्कूल 1 अप्रैल 2025 से पूर्ववर्ती सत्र के अनुसार ही फीस ले सकेंगे।
अधिसूचना में कहा गया:
“वर्ष 2025-26 के लिए यदि किसी स्कूल द्वारा अत्यधिक फीस वसूली की जाती है, तो उसे कानून के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा और यह हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।”
पीठ ने सरकार के रुख पर संतोष जताते हुए कहा, “लगता है अब विवेक आ गया है।” कोर्ट ने कहा कि उसकी चिंता केवल इस बात को लेकर थी कि सरकार इस कानून को वर्तमान सत्र में ही लागू करने की जल्दबाज़ी में थी।
कोर्ट ने कहा:
“चूंकि ASG एस.वी. राजू की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यह कानूनी व्यवस्था 2025-26 सत्र से लागू नहीं की जाएगी, अतः इस स्तर पर कोई और आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों की अपीलों का निस्तारण कर दिया।
साथ ही, शीर्ष अदालत ने स्कूलों को यह छूट दी कि वे दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित अपने मामलों के शीघ्र निपटारे की मांग कर सकते हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को टिप्पणी की थी कि इस सत्र में कानून को लागू करना “व्यावहारिक नहीं” होगा। स्कूलों ने 9 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था जिसमें कानून और 24 दिसंबर को जारी उस सर्कुलर को स्थगित करने से इनकार कर दिया गया था, जिसमें इसकी तात्कालिक प्रभावी क्रियान्वयन की बात कही गई थी।
इस सर्कुलर में कहा गया था कि सभी निजी स्कूलों को जुलाई 15 की वैधानिक समयसीमा से पहले ही, यानी जनवरी 2026 तक फीस विनियमन समितियों का गठन करना होगा। इस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से व्यावहारिक कठिनाइयों पर पुनर्विचार करने को कहा था।
अब, सरकार की इस स्पष्टता के बाद 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में दिल्ली के निजी स्कूल पूर्ववत् फीस संरचना के अनुसार ही शुल्क ले सकेंगे। हालांकि, कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अब भी हाईकोर्ट में लंबित हैं।

