यमुना में देशी मछलियों की गिरती संख्या पर एनजीटी सख्त, दिल्ली समेत पांच राज्यों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी में देशी मछलियों की घटती संख्या को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को ICAR-CIFRI (सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट) की सिफारिशों को जल्द लागू करने का निर्देश दिया है।

अधिकरण ने एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्यवाही की, जिसमें प्रयागराज स्थित CIFRI द्वारा किए गए सर्वेक्षण का हवाला था। सर्वे के अनुसार यमुना में देशी प्रजातियों — जैसे कतला, रोहू, नयन, पदिन, चितल, महाशीर — की संख्या में भारी गिरावट आई है, जबकि विदेशी प्रजातियों — जैसे थाई मांगुर, टिलापिया, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प — की संख्या बढ़ रही है, जो देशी जैव विविधता के लिए हानिकारक है।

एनजीटी की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल थे, ने कहा कि यह गिरावट प्रदूषण और विदेशी प्रजातियों की अनियंत्रित मौजूदगी का परिणाम है।

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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स और प्रदूषण नियंत्रण पर ज़ोर

अधिकरण ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को निर्देश दिए:

  • यमुना के किनारे स्थित शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्थापना और संचालन को तेज किया जाए।
  • सुनिश्चित किया जाए कि ट्रीटेड पानी जलीय जीवन के अनुकूल मानकों पर खरा उतरे।
  • सभी ULBs और उद्योगों द्वारा अपशिष्ट और सीवेज के उत्सर्जन की नियमित निगरानी की जाए।
  • नदी के विभिन्न हिस्सों में जल गुणवत्ता की निगरानी निरंतर की जाए, विशेषकर Dissolved Oxygen, BOD, Ammonia और भारी धातुओं जैसे तत्वों पर।

राज्य सरकारों और मंत्रालयों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश

NGT ने पांचों राज्य सरकारों को निर्देशित किया कि वे CIFRI की सिफारिशों को शीघ्र लागू करें, जिनमें शामिल हैं:

  • अवैध मछली पकड़ने के उपकरणों पर रोक,
  • धार्मिक अनुष्ठानों में विदेशी मछलियों को छोड़ने पर प्रतिबंध,
  • जन-जागरूकता अभियान,
  • नदी में सतत जल प्रवाह बनाए रखना,
  • उर्वरक और औद्योगिक अपशिष्ट के स्त्रोतों पर नियंत्रण।
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देशी प्रजातियों के संरक्षण के लिए महाशीर व कार्प हैचरी और फिश कंजर्वेशन ज़ोन बनाने का प्रस्ताव

  • राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और राज्य मछली पालन विभागों को थाई मांगुर जैसी आक्रामक प्रजातियों के पालन पर रोक और देशी प्रजातियों के पालन को प्रोत्साहित करने का निर्देश।
  • ICAR-CIFRI और संबंधित संस्थानों को निर्देशित किया गया कि वे मानसून के बाद चिन्हित क्षेत्रों में देशी प्रजातियों के फिंगरलिंग्स छोड़े।
  • महाशीर और इंडियन मेजर कार्प की हैचरी यमुना बेसिन में स्थापित की जाएं।
  • जैव विविधता समृद्ध हिस्सों को “फिश कंजर्वेशन ज़ोन” घोषित किया जाए।
  • पर्यावरण मंत्रालय, जल आयोग और शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया गया कि वे देशी-विदेशी मछलियों के बीच पारिस्थितिक संबंधों, प्रजनन और सहनशीलता पर अनुसंधान करें।
  • यमुना-विशिष्ट संरक्षण योजनाओं को नदी बेसिन प्रबंधन में शामिल किया जाए।
  • विदेशी प्रजातियों के अवैध छोड़ने वालों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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अंत में, एनजीटी ने मामले का निपटारा करते हुए सभी संबद्ध एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि यमुना नदी की पारिस्थितिकीय संतुलन बहाल हो और देशी मछलियों की प्रजातियाँ विशेष रूप से महाशीर और रोहू फिर से फले-फूले।

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