दो से अधिक संतान होने पर पंचायत सदस्य अयोग्य: ओडिशा हाईकोर्ट ने दो‑बच्चा नीति को बताया जनहित में आवश्यक

ओडिशा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सदस्य को दो से अधिक संतान होने के आधार पर अयोग्य ठहराने के निर्णय को बरकरार रखते हुए दो‑बच्चा नीति और जनसंख्या नियंत्रण की नीति को संविधानसम्मत और सामाजिक रूप से आवश्यक बताया है।

ओडिशा हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति कृष्ण श्रीपद दीक्षित और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दाश शामिल थे, ने एक ग्राम पंचायत सदस्य की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने दो से अधिक संतान होने के आधार पर हुई अयोग्यता को चुनौती दी थी।

अपीलकर्ता ने 5 दिसंबर 2025 के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उसका तर्क था कि वर्ष 1993 और 1994 में पैदा हुए तीसरे और चौथे बच्चे को ध्यान में रखते हुए उसे ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 की धारा 25(1)(v) के प्रावधान में दी गई छूट का लाभ मिलना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह संशोधन 18 अप्रैल 1994 से प्रभावी हुआ था और अपीलकर्ता ने संशोधन की प्रभावी तिथि के बाद भी दो से अधिक बच्चे पैदा किए, जो कि अयोग्यता की शर्त को पूरा करता है।

न्यायमूर्ति दीक्षित ने यह स्पष्ट किया कि अधिनियम में दी गई छूट केवल उन्हें मिलती है जिनके पास संशोधन लागू होने से पहले या एक वर्ष के भीतर दो से अधिक बच्चे थे, लेकिन उन्होंने बाद में और संतान नहीं उत्पन्न की हो। अपीलकर्ता इस श्रेणी में नहीं आता।

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फैसले में एक खंड “A Fragment on the Laudable Policy of Family Planning & Its Dire Need” के तहत न्यायमूर्ति दीक्षित ने जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने विंस्टन चर्चिल के उस कथन का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि “भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि मात्र एक जनसंख्या है” — और कहा कि आज की जनसंख्या स्थिति देखकर चर्चिल की टिप्पणी और भी कठोर होती।

उन्होंने थॉमस मॉल्थस, बर्ट्रेंड रसेल जैसे विचारकों तथा WHO और UNFPA की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए बताया कि अत्यधिक जनसंख्या संसाधनों पर दबाव, पर्यावरणीय क्षरण और सामाजिक‑आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

न्यायालय ने 42वें संविधान संशोधन का हवाला दिया, जिसमें “जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन” को समवर्ती सूची में जोड़ा गया था, और कहा कि यह नीति के स्तर पर एक गंभीर प्रयास को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि ओडिशा उन राज्यों में शामिल है जहां जनसंख्या नियंत्रण को लेकर विशेष प्रयास आवश्यक हैं।

खंडपीठ ने कहा:

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“यदि जनप्रतिनिधि स्वयं इस नियम का पालन नहीं करेंगे, तो जनता के सामने वे क्या उदाहरण पेश करेंगे?”

अदालत ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि दो से अधिक संतान होने पर पंचायत सदस्य की अयोग्यता विधिसंगत है। साथ ही, जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की नीति को राष्ट्रहित में आवश्यक ठहराया।

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