SLST 2025 में दिव्यांगों के आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप: कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एसएससी से मांगा जवाब

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे स्कूलों में सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित सेकेंड स्कूल लेवल सिलेक्शन टेस्ट (SLST) 2025 में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों से जुड़ी याचिका पर चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करें।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के हलफनामों के बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद मामला आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिका में कहा गया है कि SLST 2025 के तहत नियुक्तियों में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act) और उससे संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि दिव्यांग श्रेणी के तहत 100 पद इसलिए रिक्त रह गए क्योंकि आयोग द्वारा उपयुक्त उम्मीदवारों को चिन्हित नहीं किया गया।

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याचिका में यह भी प्रार्थना की गई कि इन रिक्त पदों की प्रकृति को बदले बिना किसी अन्य श्रेणी में नियुक्ति न की जाए, जब तक कोर्ट इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय न ले ले।

एसएससी ने कोर्ट को बताया कि आरक्षण के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है और यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप है। राज्य सरकार ने भी याचिकाकर्ता की मांगों का विरोध किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों के लिए जो 100 पद रिक्त हैं, उनकी प्रकृति नहीं बदली जाएगी और आयोग द्वारा इन पर उठाए गए किसी भी प्रकार के कदम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।

पक्षकारों द्वारा हलफनामे दाखिल किए जाने के बाद कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। कोर्ट ने फिलहाल SLST 2025 की भर्ती प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि दिव्यांग श्रेणी की रिक्तियों में कोई बदलाव न किया जाए।

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