लखनऊ की एमपी/एमएलए विशेष अदालत ने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता पर याचिका खारिज की, कहा– नागरिकता पर फैसला करने का अधिकार नहीं

लखनऊ स्थित विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने बुधवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता को लेकर दायर एक याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायाधीश आलोक वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों पर निर्णय देने का अधिकार इस अदालत को नहीं है। अदालत ने यह आदेश 14 जनवरी को सुनवाई पूरी करने के बाद सुरक्षित रख लिया था, जिसे 28 जनवरी को सुनाया गया।

यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जांच कराने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने कथित रूप से ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त कर रखी है और इस तथ्य को छुपाया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, फॉरेनर्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट के तहत कई धाराओं में कार्रवाई की मांग की थी।

शुरुआत में यह मामला रायबरेली की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में दायर किया गया था। लेकिन 17 दिसंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शिकायतकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए इसे लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था।

हालांकि अब विशेष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में नागरिकता की वैधता पर कोई निर्णय नहीं दे सकती, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

फिलहाल राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। आगामी बजट सत्र से पहले राहुल गांधी के लिए यह आदेश कुछ हद तक राहत माने जा रहा है।

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गौरतलब है कि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर पूर्व में भी कई बार राजनीतिक विवाद खड़े हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कानूनी निष्कर्ष नहीं निकला है।

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