इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों ने UGC की नई एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस को बताया ‘विभाजनकारी’, 48 घंटे में वापसी की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों के एक समूह ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026 के खिलाफ प्रदर्शन किया। वकीलों ने इन दिशा-निर्देशों को ‘विभाजनकारी’ करार दिया और चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे में इन्हें वापस नहीं लिया गया, तो वे जन आंदोलन शुरू करेंगे।

हाईकोर्ट के पास स्थित अम्बेडकर चौराहे पर वकीलों ने नारेबाजी की और UGC के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations (PEHEIR) 2026 की प्रति जलाकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह नियम समाज को बांटने वाला है और विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य बढ़ाएगा।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व संयुक्त सचिव अशुतोष तिवारी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “जनता में पहले से ही आक्रोश है। अगर यह नियम वापस नहीं लिया गया, तो वकील जन आंदोलन शुरू करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।”

READ ALSO  बेल्जियम की नागरिकता प्राप्त करने के बाद भारतीय पासपोर्ट का उपयोग करके अन्य देशों की यात्रा करने वाले व्यक्ति के लिए कोई राहत नहीं

UGC द्वारा जारी ये नए नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता आदि के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को खत्म करने के लिए लाए गए हैं। इसमें विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और दिव्यांगजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

हालांकि, इन नियमों का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ छात्रों और वकीलों द्वारा यह कहते हुए किया जा रहा है कि ये दिशा-निर्देश केवल कुछ वर्गों को ही संरक्षण देते हैं और सभी को समान सुरक्षा का अवसर नहीं देते।

READ ALSO  वैवाहिक विवाद किसी के घर में घुसकर मारपीट करने का लाइसेंस नहीं देता: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

विरोध कर रहे वकीलों का कहना है कि समानता और सामाजिक न्याय के नाम पर समाज में नए तनाव पैदा नहीं होने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार को सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और समावेशी नीति बनानी चाहिए।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles