गुजरात हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 148 के तहत जारी किए गए पुनर्मूल्यांकन (reassessment) नोटिस को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को स्वीकार कर लिया है। जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 30 जून, 2022 को जारी किया गया नोटिस कानूनन समय-बाधित (time-barred) था क्योंकि यह विभाग के पास उपलब्ध “सर्वाइविंग टाइम” (शेष अवधि) के समाप्त होने के बाद जारी किया गया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनियन ऑफ इंडिया बनाम राजीव बंसल मामले में तय किए गए सिद्धांतों का पालन किया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता, आशाबेन चंद्रकांत अशर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने निर्धारण वर्ष (Assessment Year) 2017-2018 के लिए धारा 148 के तहत जारी 30 जून, 2022 के नोटिस की वैधता को चुनौती दी थी।
तथ्यों के अनुसार, प्रतिवादी असेसिंग ऑफिसर ने शुरुआत में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (रिलैक्सेशन ऑफ सर्टेन प्रोविजन्स) ऑर्डिनेंस, 2020 (“TOLA”) के तहत बढ़ाई गई समय सीमा के दौरान 11 जून, 2021 को धारा 148 का नोटिस जारी किया था। बाद में, सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम आशीष अग्रवाल (2022) के फैसले के मद्देनजर, इस नोटिस को धारा 148A(b) के तहत कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) माना गया।
आशीष अग्रवाल मामले के निर्देशों का पालन करते हुए, असेसिंग ऑफिसर ने 17 मई, 2022 को याचिकाकर्ता को संबंधित जानकारी (information) उपलब्ध कराई। इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने 30 मई, 2022 को अपना उत्तर दाखिल किया। इसके बाद, अधिकारी ने धारा 148A(d) के तहत आदेश पारित किया और अंततः 30 जून, 2022 को धारा 148 का विवादित नोटिस जारी किया।
पक्षकारों की दलीलें
याचिकाकर्ता की मुख्य दलील यह थी कि 30 जून, 2022 को जारी किया गया नोटिस अवैध और समय-बाधित है। उन्होंने तर्क दिया कि नोटिस जारी करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित “सर्वाइविंग टाइम” के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश हुए विद्वान सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल श्री मौनिल याग्निक ने तारीखों का सत्यापन किया और वे कार्यवाही में शामिल तिथियों का खंडन नहीं कर सके।
कोर्ट का विश्लेषण
हाईकोर्ट ने अपने विश्लेषण का आधार सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम राजीव बंसल (2024) के फैसले को बनाया। इस फैसले में यह तय किया गया था कि TOLA के तहत जारी शुरुआती नोटिस और 30 जून, 2021 के बीच बचे हुए समय (“surviving time”) के आधार पर ही नए नोटिस की वैधता तय होगी।
कोर्ट ने अपने हालिया फैसले धनराज गोविंदराम केला बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर (SCA नंबर 6387 ऑफ 2023, निर्णय दिनांक 8 जुलाई, 2025) का भी हवाला दिया, जिसमें समान मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
मौजूदा मामले के तथ्यों पर इन सिद्धांतों को लागू करते हुए, बेंच ने समय सीमा (limitation period) की गणना इस प्रकार की:
- जानकारी उपलब्ध कराने की तिथि: 17 मई, 2022।
- जवाब देने का समय: 15 दिन (नियत तिथि: 1 जून, 2022)।
- सर्वाइविंग टाइम की समाप्ति: TOLA के साथ पठित मूल नोटिस जारी करने की तिथि से 30 जून, 2021 तक की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने पाया कि नई व्यवस्था के तहत धारा 148 का नोटिस जारी करने की समय सीमा 18 जून, 2022 को ही समाप्त हो गई थी।
कोर्ट ने राजीव बंसल के फैसले के पैरा 114(h) का उल्लेख करते हुए कहा कि असेसिंग ऑफिसर्स को “सर्वाइविंग टाइम” के भीतर ही नोटिस जारी करना आवश्यक था, और इस अवधि के बाद जारी सभी नोटिस समय-बाधित होने के कारण रद्द किए जाने योग्य हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
“मामले के तथ्यों में… धारा 148 के तहत जारी 30.06.2022 का विवादित नोटिस अवैध होगा क्योंकि यह नोटिस 18.06.2022 के बाद जारी किया गया है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आशीष अग्रवाल मामले के निर्णय के अनुसार समय सीमा थी।”
फैसला
हाईकोर्ट ने पाया कि नोटिस स्वीकार्य समय सीमा के बाद जारी किया गया था। तदनुसार, कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए 30 जून, 2022 के नोटिस और उससे जुड़ी सभी परिणामी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
केस विवरण:
- केस टाइटल: आशाबेन चंद्रकांत अशर बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर, वार्ड 1
- केस नंबर: आर/स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर 17566 ऑफ 2022
- कोरम: जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी

