बड़ी जनसभाओं में भगदड़ रोकने के लिए एसओपी की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सर्वव्यापी निर्देश देने से इनकार किया, याचिकाकर्ता से कहा- गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग से संपर्क करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ी सार्वजनिक भीड़—जैसे धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक रैलियों और यात्राओं—के दौरान भगदड़ की घटनाओं को रोकने के लिए एक सर्वव्यापी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मुद्दे को गृह मंत्रालय (MHA) और चुनाव आयोग (EC) के समक्ष उठाएं।

सुनवाई की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि न्यायपालिका की ऐसी नीतिगत मामलों में भूमिका क्या हो सकती है, जो सीधे तौर पर भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े हैं।

“मान लीजिए कोई दिल्ली में धरना देना चाहता है, तो हम उसे रेगुलेट कर सकते हैं कि किसी को दिक्कत न हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी बनी रहे। लेकिन अगर चेन्नई में कोई रैली होती है, जहां 10,000 की जगह 50,000 लोग आ जाएं, तो फिर क्या होगा?” — मुख्य न्यायाधीश

तुम्बलम गूटी वेंकटेश द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह देशभर में बड़े आयोजनों के लिए एक बाध्यकारी SOP बनाए और लागू करे। साथ ही, चुनाव आचार संहिता के दौरान राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन के लिए अलग SOP लागू करने की बात कही गई थी।

READ ALSO  विनियमन 351ए सीएसआर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 साल पुराने आरोपों के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही पर रोक लगाई

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 18 दिसंबर 2025 को गृह मंत्रालय को इस संबंध में प्रतिनिधित्व भेजा था, और मात्र तीन दिन बाद ही 21 दिसंबर को याचिका दायर कर दी गई।

“यह विषय नीति निर्माण से जुड़ा है और इसमें कानून-व्यवस्था के विशेषज्ञों की भूमिका अधिक उपयुक्त है। चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही गृह मंत्रालय को प्रतिनिधित्व दे चुके हैं, इसलिए हम याचिका का निपटारा कर रहे हैं ताकि वे इसे आगे मंत्रालय और चुनाव आयोग के समक्ष रख सकें।” — सुप्रीम कोर्ट

करूर और RCB हादसों का उल्लेख

याचिकाकर्ता के वकील ने करूर और आरसीबी (RCB) इवेंट में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में कुल 56 लोगों की जान गई है, और फिलहाल केवल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) इस विषय को टुकड़ों में देखता है।

उन्होंने ‘उपहार सिनेमा कांड’ के बाद सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अदालत ने सुरक्षा मानकों और लाइसेंसिंग प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने UAPA FIR के खिलाफ प्रबीर पुरकायस्थ की याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा

वकील ने तर्क दिया कि “भगदड़” शब्द की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है और गृह मंत्रालय को भेजे गए उनके निवेदनों का अब तक कोई जवाब नहीं आया है। इस पर CJI ने कहा कि प्रतिनिधित्व दिए हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और सरकार को “breathing time” मिलना चाहिए।

अंततः कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता दी कि वे इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों के समक्ष आगे बढ़ाएं।

READ ALSO  हेट स्पीच से माहौल खराब हो रहा है और इसे रोका जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया कि भीड़ नियंत्रण जैसे मामले नीति और प्रशासनिक क्षेत्र में आते हैं और इन पर अदालत द्वारा सर्वव्यापी निर्देश देना व्यावहारिक नहीं होगा। पीठ ने कहा कि इस विषय पर उपयुक्त प्राधिकरण ही निर्णय ले सकते हैं।

इस प्रकार याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles