बाल तस्करी के मामलों पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त: राज्य सरकार को बाहरी व्यक्तियों की पहचान के लिए दिशा-निर्देश बनाने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्य से बाहर से आने वाले व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करे। यह निर्देश गुमला जिले से लापता हुई एक छह वर्षीय बच्ची के मामले में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि ऐसे मामलों में स्थानीय थाना प्रभारी को पहचान की प्रक्रिया अपनानी चाहिए

यह याचिका चंद्रमुनि उरांव द्वारा दायर की गई थी, जिनकी बेटी 2018 में गुमला से लापता हो गई थी। सुनवाई के दौरान गुमला एसपी हैरिस बिन जमान ने अदालत को बताया कि एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर बच्ची की तलाश की जा रही है।

हालांकि अब तक उक्त बच्ची नहीं मिली है, लेकिन जांच के दौरान मानव तस्करी का शिकार बने 9 अन्य बच्चों को बरामद किया गया है। एसपी ने बताया कि बच्ची की तलाश लगातार जारी है।

राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रांची पुलिस ने हाल ही में एक अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर से दो नाबालिग भाई-बहनों को भी हाल ही में मुक्त कराया गया है।

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कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कई तस्करी मामलों में आरोपी राज्य के बाहर से आए अवैध दस्तावेज रहित लोग थे।

कोर्ट ने आदेश में कहा:

“यह अपराध बच्चों के शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास पर विनाशकारी प्रभाव डालता है। पीड़ितों को आजीवन स्वास्थ्य समस्याएं, गहरा मानसिक आघात, चिंता, अवसाद और सामाजिक एकीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

अदालत ने यह भी कहा कि तस्करी के दौरान बच्चों को चरम हिंसा का शिकार होने की संभावना लगभग दोगुनी होती है।

  • गृह विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअल उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है ताकि मानव तस्करी की समस्या से निपटने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की जा सके।
  • गुमला एसपी को अब तक की जांच की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया गया है।
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मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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