दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने नाम पर वर्ष 2017 में गठित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ को “फर्जी, जाली और धोखाधड़ी से बनाया गया” बताते हुए उसे शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की है।
उन्होंने ट्रस्ट की आड़ में अपनी संपत्तियों के हस्तांतरण को “सुनियोजित धोखाधड़ी” करार देते हुए अपनी बहू प्रिया कपूर और अन्य पारिवारिक सदस्यों को इस ट्रस्ट के माध्यम से कोई भी कार्यवाही करने से स्थायी रूप से रोकने की मांग की है।
रानी कपूर की ओर से दायर सिविल मुकदमे में कहा गया है कि उनके दिवंगत पति सुरिंदर कपूर—जो कि सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के प्रमोटर थे—की संपूर्ण संपत्ति की वे अकेली उत्तराधिकारी थीं। लेकिन एक जटिल और धोखाधड़ी से भरे लेन-देन के जाल के जरिए उनकी जानकारी के बिना वह पूरी संपत्ति एक कथित ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गई।
“प्रतिवादी संख्या 1 से 9 और उनके बेटे संजय कपूर की मिलीभगत से उनकी सभी संपत्तियां एक फर्जी ट्रस्ट—‘आरके फैमिली ट्रस्ट’—में स्थानांतरित कर दी गईं, जिसकी न तो उन्हें जानकारी थी और न ही उन्होंने कभी उस पर सहमति दी,” याचिका में कहा गया।
मामले में प्रतिवादी बनाए गए लोगों में संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया कपूर के साथ-साथ उनके करिश्मा कपूर से हुए दो बच्चे भी शामिल हैं। ये दोनों बच्चे पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अपने पिता की कथित वसीयत की वैधता को चुनौती दे चुके हैं, जिसमें उन्होंने प्रिया कपूर पर “लालची” होने का आरोप लगाया है।
संजय कपूर का निधन 12 जून को इंग्लैंड में पोलो मैच के दौरान हुआ था, जब वे मैदान पर गिर पड़े। बताया गया कि उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया था।
रानी कपूर का कहना है कि संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में कभी उन्हें यह नहीं बताया कि उनकी संपत्तियां ट्रस्ट को स्थानांतरित कर दी गई हैं, और न ही कभी उस ट्रस्ट की प्रति उन्हें सौंपी गई।
याचिका पर सुनवाई अब दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। यह देखना बाकी है कि अदालत प्राथमिक रूप से कोई अंतरिम राहत देती है या ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच का आदेश देती है।

