सुप्रीम कोर्ट ने रूस भागी महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार को 4 सप्ताह का समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है ताकि उस रूसी महिला और उसके बच्चे का पता लगाया जा सके जो अपने भारतीय पति के साथ चल रहे कस्टडी विवाद के बीच भारत से भागकर रूस चली गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमय बागची की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर संज्ञान लिया, जिन्होंने बताया कि महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए इंटरपोल नोटिस जारी किए जा चुके हैं और सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

भाटी ने कहा, “कुछ अपडेट्स मिल रहे हैं… कृपया कुछ और समय दें, हम विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत का “ऑल-वेदर फ्रेंड” है और वहां के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

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कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह की मोहलत देते हुए यह भी दोहराया कि भारतीय दूतावास, मॉस्को को निर्देश दिया गया है कि वह रूस की जांच समिति के साथ समन्वय बनाकर महिला और बच्चे का पता लगाए और बच्चे की कुशलता से जुड़ी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

अदालत ने इस पूरे मामले को भारत-रूस रिश्तों की संवेदनशीलता से जोड़ते हुए कहा, “हम ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहते जिससे भारत और रूस के संबंधों को ठेस पहुंचे, लेकिन इसमें एक बच्चे का मामला भी जुड़ा है। हमें उम्मीद है कि बच्चा मां के साथ सुरक्षित और स्वस्थ है। हम बस यही आशा कर सकते हैं कि यह किसी मानव तस्करी का मामला न हो।”

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महिला वर्ष 2019 से भारत में X-1 वीज़ा पर रह रही थी, जिसकी मियाद खत्म हो चुकी थी, लेकिन न्यायालय की सुनवाई लंबित होने के चलते उसका वीज़ा समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा।

22 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की अस्थायी कस्टडी को लेकर आदेश दिया था कि सप्ताह में तीन दिन (सोमवार से बुधवार) मां के पास रहेंगे, और बाकी चार दिन पिता के पास। लेकिन जुलाई 2025 में महिला बच्चे को लेकर फरार हो गई।

17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वह तुरंत बच्चे का पता लगाए और केंद्र को यह सुनिश्चित करने के लिए लुक-आउट सर्कुलर जारी करने को कहा गया था कि महिला देश छोड़कर न जा सके।

21 जुलाई को कोर्ट को बताया गया कि महिला नेपाल बॉर्डर के रास्ते बच्चे को लेकर देश से निकल गई और शारजाह होते हुए रूस पहुंच गई। कोर्ट ने इस स्थिति को “अस्वीकार्य” और “घोर अवमानना” बताया।

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बच्चे के पिता ने अदालत में कहा है कि उन्हें महिला और अपने बच्चे की कोई जानकारी नहीं है और वह अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रही हैं।

अब चार सप्ताह बाद केंद्र सरकार को अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि रूस में महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

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