त्यौहारों में हवाई किराए की लूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा, “हम जरूर हस्तक्षेप करेंगे”

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को त्यौहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इसे यात्रियों के साथ “शोषण” करार दिया। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे में हस्तक्षेप करेगी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एयरलाइनों द्वारा अचानक और अत्यधिक किराया वसूली पर चिंता जताई। अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निजी एयरलाइनों द्वारा मनमाने हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क वसूली को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामकीय दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है।

पीठ ने कहा, “हम निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेंगे। ‘कुंभ’ और अन्य त्यौहारों के दौरान यात्रियों के शोषण को देखिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर तक के किराए देखिए।” यह टिप्पणी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक को संबोधित करते हुए की गई, जो केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए थे।

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न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने, हल्के-फुल्के अंदाज़ में, कोर्टरूम में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “शायद अहमदाबाद के लिए हवाई किराए नहीं बढ़े हों, लेकिन जोधपुर जैसे शहरों के लिए किराए जरूर आसमान छूने लगे हैं।”

अदालत ने केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी तय की है।

कोविड के बाद भारत में हवाई किराए के लिए एक बैंड-आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली लाई गई थी, जिसे बाद में हटा दिया गया। अब निजी एयरलाइंस द्वारा अपनाई गई डायनामिक प्राइसिंग प्रणाली के चलते मांग के अनुसार किराए में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। धार्मिक आयोजनों जैसे कुंभ, या प्रमुख त्यौहारों के दौरान कुछ रूट्स पर किराए कई गुना बढ़ जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यात्रियों में एयरलाइनों की कीमत नीति को लेकर लंबे समय से असंतोष और नाराजगी रही है। अदालत की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख संभावित रूप से आने वाले समय में किराया नियमन की दिशा में बदलाव का संकेत दे सकता है।

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