केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में विजयी 50 में से 20 भाजपा पार्षदों द्वारा लिए गए शपथ को कथित रूप से अमान्य बताते हुए दाखिल याचिका पर विचार करते हुए राज्य चुनाव आयोग, केरल सरकार और संबंधित पार्षदों से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति पी. वी. कुन्हिकृष्णन की एकल पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले में “याचिकाकर्ता की दलीलों में कुछ दम है”, क्योंकि केरल नगरपालिका अधिनियम, 1994 की तीसरी अनुसूची के अनुसार, पार्षदों को “ईश्वर के नाम पर या गंभीरता से पुष्टि करते हुए” शपथ लेनी होती है।
याचिका में आरोप है कि 20 भाजपा पार्षदों ने यह शपथ “गुरुदेव नमथिल”, “उदयन्नूर देवियुडे नमथिल”, “कविलम्मायुदे नमथिल”, “भगवत नमथिल”, “श्री पद्मनाभ स्वामीयुडे नमथिल”, “भारतंबायुदे नमथिल”, “एंटे प्रस्थानथिले बलिदानिकलुडे पेरिल” आदि के नाम पर ली, जो कानूनी प्रारूप के अनुरूप नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
“ईश्वर अलग-अलग लोगों के लिए अलग हो सकता है। कोई अपने गुरु, जीवित व्यक्ति या किसी संत को अपना ईश्वर मानता है, तो यह उसकी व्यक्तिगत आस्था है। लेकिन क्या कोई व्यक्ति ऐसे गुरु या जीवित व्यक्ति के नाम पर शपथ ले सकता है, यह एक गंभीर कानूनी प्रश्न है।”
न्यायालय ने कहा कि prima facie (प्रथम दृष्टया) याचिकाकर्ता ने विचारणीय मामला पेश किया है और इसलिए याचिका को स्वीकार किया जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 20 पार्षदों द्वारा ली गई शपथ writ petition के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 45 वर्षों से काबिज वाम मोर्चा (LDF) को पराजित कर बहुमत हासिल किया है।
यह कानूनी विवाद न केवल शपथ की वैधता पर सवाल खड़ा करता है बल्कि नव-निर्वाचित निगम परिषद की वैधानिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है। कोर्ट में अगली सुनवाई तक इन 20 पार्षदों की सदस्यता विवाद के घेरे में बनी रहेगी।

