सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की रहस्यमय मृत्यु से जुड़े बहुचर्चित मामले में आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी होती नहीं दिख रही है और तिवारी मामले के मुख्य अभियुक्त भी प्रतीत नहीं होते।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
महंत नरेंद्र गिरी 20 सितंबर 2021 को प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में अपने कक्ष में मृत पाए गए थे। उनके शिष्यों ने उनका शव लटका हुआ पाया था। घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट और एक वीडियो बरामद हुआ था जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी (बड़े हनुमान मंदिर के तत्कालीन पुजारी) और उनके बेटे संदीप तिवारी पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था।
घटना के अगले दिन, 21 सितंबर 2021 को प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में सीबीआई द्वारा 18 नवंबर 2021 को दायर आरोपपत्र में हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120बी) के आरोप भी जोड़े गए।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रायल की प्रक्रिया अत्यधिक धीमी है। सीबीआई ने कुल 150 गवाहों की सूची दी है, लेकिन अब तक केवल 3 की ही गवाही हो सकी है।
पीठ ने कहा,
“यह स्पष्ट है कि ट्रायल को समाप्त होने में समय लगेगा। इसके अलावा, अपीलकर्ता इस मामले का मुख्य अभियुक्त प्रतीत नहीं होता। अतः हमारा विचार है कि ट्रायल की अवधि के दौरान अपीलकर्ता की आगे की हिरासत आवश्यक नहीं है।”
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि तिवारी 22 सितंबर 2021 से हिरासत में हैं और ट्रायल लंबा खिंचने की संभावना को देखते हुए उनकी जमानत मंजूर की जाती है।
कोर्ट ने आदेश में यह शर्त भी जोड़ी कि तिवारी कोई गवाह को न तो धमकाएंगे, न प्रभावित करेंगे और न ही उन्हें कोई प्रलोभन देंगे। उन्हें ट्रायल की प्रत्येक कार्यवाही में उपस्थित रहना होगा, जब तक कि विशेष रूप से छूट न दी जाए। किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर ट्रायल कोर्ट को जमानत रद्द करने की स्वतंत्रता होगी।
सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि महंत नरेंद्र गिरी को उनके शिष्यों द्वारा मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने समाज में अपमान और बदनामी से बचने के लिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। एजेंसी ने एक कथित वीडियो का भी उल्लेख किया है, जिसमें महंत ने दावा किया था कि आनंद गिरी उनके खिलाफ एक “एडिटेड वीडियो” वायरल करने की धमकी दे रहे थे।

