यदि परिवार का एक सदस्य नौकरी में है तो अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं, मृत्यु की तिथि पर लागू नीति ही होगी मान्य: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति ही अनुकंपा नियुक्ति के दावों पर विचार करने के लिए मान्य होगी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एसईसीएल (SECL) के दिवंगत कर्मचारी के परिजनों द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए कहा कि बाद में जारी किए गए सर्कुलर को भूतलक्षी प्रभाव (Retrospectively) से लागू नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मृतक कर्मचारी का कोई आश्रित पहले से ही रोजगार में है, तो परिवार के अन्य सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं माने जाएंगे, चाहे वह रोजगार किसी भी स्वरूप का क्यों न हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एसईसीएल के दिवंगत सबऑर्डिनेट इंजीनियर लखन लाल चंद्रा के परिवार से जुड़ा है, जिनका 26 दिसंबर 2018 को आकस्मिक निधन हो गया था। उनके निधन के बाद, उनके पुत्र मिंकेतन चंद्रा (अपीलकर्ता नंबर 1) ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

एसईसीएल प्रबंधन ने 20 अगस्त 2020 को उनके आवेदन को खारिज कर दिया। अस्वीकृति का मुख्य आधार यह था कि मृतक की पत्नी और अपीलकर्ता की मां, नीलम चंद्रा, पहले से ही विद्युत गृह हायर सेकेंडरी स्कूल नंबर 1, कोरबा में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। इस निर्णय के खिलाफ परिवार ने एकल पीठ (Single Judge) के समक्ष याचिका दायर की थी, जिसे 9 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ के समक्ष यह अपील दायर की।

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अपीलकर्ताओं का पक्ष

अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता योगेश कुमार चंद्रा ने तर्क दिया कि एकल पीठ ने 25 जून 2024 को जारी संशोधित सर्कुलर पर विचार नहीं किया। उन्होंने दलील दी कि:

  • 2024 के सर्कुलर के क्लॉज 1.6 (vii) के तहत, यदि परिवार का कोई सदस्य नौकरी में है, तब भी अतिरिक्त आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है।
  • मृतक की पत्नी (मां) की नौकरी अस्थाई है और वह एसईसीएल (SECL) में कार्यरत नहीं हैं।
  • दिवंगत कर्मचारी गैर-कार्यकारी (Non-executive) संवर्ग में थे, इसलिए उन पर ‘राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता’ (NCWA) लागू होना चाहिए, जो ऐसी नियुक्ति को प्रतिबंधित नहीं करता।
  • परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

प्रतिवादियों (SECL) का पक्ष

एसईसीएल की ओर से अधिवक्ता वैभव शुक्ला ने अपील का विरोध करते हुए कहा:

  • 25 जून 2024 का सर्कुलर इस मामले में लागू नहीं हो सकता क्योंकि कर्मचारी की मृत्यु 2018 में हुई थी। अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मृत्यु की तिथि पर ही उत्पन्न होता है, इसलिए उसी समय की नीति लागू होगी।
  • मृतक कर्मचारी मृत्यु के समय ‘एग्जीक्यूटिव’ (Executive) संवर्ग में कार्यरत थे, इसलिए उन पर 13 मार्च 1981 का सर्कुलर लागू होता है।
  • 1981 के सर्कुलर के क्लॉज (vii) के अनुसार, यदि मृतक का कोई एक आश्रित पहले से नौकरी में है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
  • मां की नौकरी का स्वरूप (अस्थाई या स्थाई) या नियोक्ता (SECL या अन्य) इस नीति के तहत अप्रासंगिक है।
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हाईकोर्ट का विश्लेषण और निर्णय

खंडपीठ ने मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद एकल पीठ के निर्णय को सही ठहराया। कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु स्पष्ट किए:

  1. मृत्यु की तिथि पर लागू नीति ही सर्वोपरि: कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति भर्ती के सामान्य नियमों का अपवाद है और इसका उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है। कोर्ट ने टिप्पणी की:
    “कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू नीति ही दावे को नियंत्रित करती है, और बाद के संशोधनों या सर्कुलर को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसमें स्पष्ट रूप से ऐसा प्रावधान न हो।” अतः 2024 के सर्कुलर का हवाला देना “गलत” माना गया।
  2. एग्जीक्यूटिव पॉलिसी की बाध्यता: कोर्ट ने अपीलकर्ताओं के इस तर्क को खारिज कर दिया कि मृतक NCWA द्वारा शासित थे। रिकॉर्ड के अनुसार, मृतक को सेवा लाभों के उद्देश्य से एग्जीक्यूटिव कर्मचारी माना गया था। कोर्ट ने कहा कि भले ही वे शुरू में नॉन-एग्जीक्यूटिव रहे हों, लेकिन मृत्यु के समय उन्हें एग्जीक्यूटिव माना जा रहा था, इसलिए एग्जीक्यूटिव सर्कुलर ही लागू होगा।
  3. रोजगार होने पर नियुक्ति नहीं: 13 मार्च 1981 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि एक आश्रित नियोजित है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया:
    “नीति में अस्थाई या स्थाई रोजगार के बीच कोई अंतर नहीं किया गया है, और न ही यह प्रतिबंध केवल एसईसीएल (SECL) में रोजगार तक सीमित है। परिवार में कमाने वाले सदस्य की मौजूदगी दावेदार को अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत विचार के लिए अयोग्य बनाती है।”
  4. सहानुभूति नियम के विरुद्ध नहीं: आर्थिक तंगी की दलील पर कोर्ट ने कहा कि इसे सामान्य तरीके से उठाया गया है और कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया। कोर्ट ने जोर देकर कहा:
    “सहानुभूति या कठिनाई, चाहे वह कितनी भी वास्तविक क्यों न हो, शाससी सर्कुलर (Governing Circular) के उल्लंघन में अनुकंपा नियुक्ति देने का आधार नहीं हो सकती।”
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निष्कर्ष

अंततः, हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील को खारिज कर दिया।

केस डीटेल्स:

  • केस का नाम: मिंकेतन चंद्रा और अन्य बनाम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और अन्य
  • केस नंबर: WA No. 964 of 2025
  • कोरम: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा
  • अपीलकर्ताओं के वकील: श्री योगेश कुमार चंद्रा
  • प्रतिवादियों के वकील: श्री वैभव शुक्ला

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