छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: मुकदमा ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सह-अभियुक्तों को होने वाली परेशानी पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सह-अभियुक्तों को होने वाली संभावित कठिनाइयों पर चिंता जताई। इस मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों में एफआईआर दर्ज है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले में आरोपी रिटायर्ड अधिकारी निरंजन दास की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और शुएब आलम की दलीलें सुनीं। निरंजन दास ने उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ ट्रांसफर करने की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यूपी और छत्तीसगढ़ में दर्ज एफआईआर एक ही कथित साजिश का हिस्सा हैं और आरोप काफी हद तक समान हैं। इस पर CJI ने कहा, “आप कह रहे हैं कि दोनों राज्यों में आरोप एक जैसे हैं, लेकिन समन्वय पीठ कह चुकी है कि ये राज्य-विशिष्ट हैं।”

पीठ ने याचिका पर व्यावहारिक दिक्कतों की ओर भी इशारा किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, “यूपी की एफआईआर में कुछ आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अगर ट्रायल ट्रांसफर कर दिया गया तो उन्हें भी दिक्कत होगी।”

उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई सह-अभियुक्त नोएडा का स्थायी निवासी है तो उसका क्या होगा? “अगर वह कहे कि मुझे रायपुर नहीं बुलाया जाए, बल्कि मुकदमा नोएडा में चले, तो क्या होगा? ये परस्पर-विरोधी मांगें हैं।”

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इस पर रोहतगी ने कहा कि वह सह-अभियुक्त भी छत्तीसगढ़ में मामले का सामना कर रहा है, इसलिए उसे वहां पेश होना ही होगा। हालांकि, कोर्ट ने दोहराया कि एक आरोपी को राहत देने से दूसरे को कठिनाई हो सकती है।

CJI ने संकेत दिया कि अदालत सीमित राहत देने पर विचार कर सकती है जैसे कि शारीरिक रूप से उपस्थित होने की बाध्यता से छूट, लेकिन ट्रायल ट्रांसफर जैसे आदेश से सावधानी बरतनी होगी। “हम ऐसा आदेश न दे दें जिससे सह-अभियुक्तों को गंभीर कठिनाई हो,” कोर्ट ने कहा।

रोहतगी ने अनुरोध किया कि अदालत अन्य आरोपियों को भी सुन ले, क्योंकि आदेश का असर उन पर भी पड़ेगा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों संबंधित मामलों को एक साथ टैग किया जाए और इन पर 19 जनवरी को संयुक्त रूप से सुनवाई की जाए।

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शराब घोटाला कथित रूप से 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में हुआ, जब वहां भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस सरकार थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में राज्य की आबकारी नीति में हेरफेर कर शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

सिंडिकेट पर आरोप है कि उसने नकली होलोग्राम और बोतलों के जरिए ‘ऑफ-द-बुक’ यानी बिना रिकॉर्ड की शराब सरकारी दुकानों के जरिये बेची। इस तरह एक समानांतर और अवैध बिक्री चैनल तैयार किया गया।

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छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में इस घोटाले को लेकर कई एफआईआर दर्ज हैं और जांच अभी जारी है।

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