चीनी मांझे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त: नाबालिग के इस्तेमाल पर अभिभावक होंगे जिम्मेदार, राज्य सरकार को कड़ाई से रोक लागू करने का निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने चीनी मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने का सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि अगर कोई नाबालिग इस प्रतिबंधित मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है, तो उसके अभिभावकों को भी कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

यह आदेश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को पारित किया। अदालत ने 11 दिसंबर 2025 को चीनी मांझे से हुई दुर्घटनाओं और मौतों के मामलों का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए यह मामला शुरू किया था।

अदालत ने कहा कि चीनी मांझे का इस्तेमाल या बिक्री करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106(1) (पूर्व की धारा 304A IPC — लापरवाही से मृत्यु) के तहत आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा:

“अगर कोई नाबालिग इस चीनी नायलॉन मांझे का उपयोग करता पाया जाता है, तो उसका अभिभावक भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।”

सुनवाई के दौरान इंदौर के जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने अदालत को बताया कि पिछले डेढ़ महीने में दो लोगों की मौत चीनी मांझे से गला कटने के कारण हो चुकी है — एक 16 वर्षीय किशोर और एक 45 वर्षीय व्यक्ति। दोनों की मौत पतंग उड़ाते समय इस धारदार मांझे की चपेट में आने से हुई।

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राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई जारी है और इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अभियान चलाए जाएंगे।

कोर्ट ने आदेश में निर्देश दिए:

“प्रतिवादी यह सुनिश्चित करें कि आम जनता को व्यापक रूप से सूचित किया जाए कि यदि कोई व्यक्ति इस मांझे को बेचते या उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उस पर BNS की धारा 106(1) के तहत अभियोजन चलाया जा सकता है।”

त्योहारों, विशेष रूप से मकर संक्रांति के आसपास, चीनी मांझे की मांग बढ़ जाती है। यह मांझा प्लास्टिक आधारित और कांच के मिश्रण से बना होता है, जिससे यह बेहद तेज़ और जानलेवा हो जाता है। कई राज्यों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन बाज़ार में यह आसानी से उपलब्ध रहता है।

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हाईकोर्ट का यह आदेश मांझे से होने वाली मौतों को केवल दुर्घटना मानने की बजाय उसे आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में लाता है। इससे दोषियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकेंगे।

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