पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर अनियमितताओं के आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान कथित प्रक्रियात्मक अनियमितताओं को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन द्वारा दाखिल अंतरिम अर्जियों पर चुनाव आयोग (ECI) से जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को एक सप्ताह के भीतर इन अर्जियों पर संयुक्त जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी 2026 तय की है।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग के निर्देश व्हाट्सएप व वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मौखिक रूप से दिए जा रहे हैं, जबकि किसी तरह का लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। यह चुनाव आयोग की प्रक्रिया को मनमाना, असंवैधानिक और गैरकानूनी बनाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नाम से एक नई श्रेणी बना दी है, जिसके तहत 1.36 करोड़ से अधिक मतदाताओं को सुनवाई का नोटिस भेजा जा सकता है — और यह सब बिना किसी वैधानिक आधार के किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में 58,20,898 नाम हटा दिए गए, और इससे पहले न तो कोई नोटिस भेजा गया और न ही व्यक्तिगत सुनवाई दी गई

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इसके अतिरिक्त, 2002 की मतदाता सूची से मेल न खाने वाले 31.68 लाख मतदाताओं को स्वतः ही सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जबकि इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं बताई गई है।

सांसदों की अर्जियों में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि:

  • दावों और आपत्तियों की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2026 को आगे बढ़ाया जाए
  • बूथ लेवल अफसरों (BLOs) को व्हाट्सएप या मौखिक आदेशों के ज़रिए निर्देश देना तत्काल रोका जाए
  • अब तक दिए गए सभी गैर-लिखित निर्देशों को अवैध घोषित किया जाए
  • वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और बीमार मतदाताओं को फिजिकल सुनवाई में आने के लिए मजबूर न किया जाए
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सांसद डोला सेन की ओर से दाखिल अलग याचिका में भी SIR को “मनमाना, असंवैधानिक और वैध मतदाताओं को गलत ढंग से सूची से हटाने वाला” करार दिया गया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे “डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी” बढ़ रही है और कुछ लोगों की मृत्यु, अस्पताल में भर्ती होने और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी हुई हैं।

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चुनाव आयोग की ओर से पहले दो सप्ताह का समय मांगा गया था, लेकिन पीठ ने केवल एक सप्ताह की मोहलत दी है। अब इस मामले की सुनवाई 19 जनवरी को होगी।

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