सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेपीसीए) के आगामी चुनावों के नतीजे घोषित करने पर रोक लगा दी है और कहा है कि मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को की जाएगी। अदालत ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया जिनमें चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। हालांकि अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है।
जेपीसीए से जुड़े कई क्रिकेट क्लबों द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि एसोसिएशन के संविधान के अनुसार स्वतंत्र निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो निष्पक्ष रूप से मतदाता सूची तैयार करे और चुनाव संपन्न कराए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाए और वर्तमान बीसीसीआई की उप-समिति से जेपीसीए का दैनिक प्रशासनिक कार्यभार वापस ले लिया जाए।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची तैयार करने में एसोसिएशन के संविधान का उल्लंघन किया गया है और 16 मान्यता प्राप्त क्लबों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया जारी रह सकती है लेकिन चुनाव के नतीजे तब तक घोषित नहीं किए जाएंगे जब तक इस मामले की विस्तृत सुनवाई नहीं हो जाती। आदेश में कहा गया, “चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।”
गौरतलब है कि जेपीसीए पिछले कुछ वर्षों से बीसीसीआई द्वारा गठित एक उप-समिति के नियंत्रण में है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के तहत इस उप-समिति को एसोसिएशन का संचालन सौंपा गया था। अब जब चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई है, तो स्थानीय क्लबों ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
यह मामला अब 2 फरवरी को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा, जहां अदालत यह तय करेगी कि चुनाव प्रक्रिया को फिर से व्यवस्थित किया जाना चाहिए या नहीं, और क्या बीसीसीआई की वर्तमान समिति को प्रशासनिक कार्य से हटाया जाना चाहिए।

