मद्रास हाईकोर्ट का आदेश: विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को तुरंत UA 16+ प्रमाणपत्र दे CBFC; सेंसर बोर्ड करेगा अपील

अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ को राहत देते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिया कि वह फिल्म को बिना विलंब UA 16+ प्रमाणपत्र जारी करे। अदालत ने CBFC चेयरपर्सन द्वारा फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजे जाने के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर करार देते हुए रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति पी टी आषा ने केवीएन प्रोडक्शंस के के. वेंकट नारायण द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में CBFC चेयरपर्सन के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें उन्होंने एक्सामिनिंग कमेटी द्वारा UA सर्टिफिकेट देने की सिफारिश के बावजूद फिल्म को पुनः समीक्षा के लिए रिवाइजिंग कमेटी को भेज दिया था।

“एक बार बोर्ड निर्णय ले ले और उसे निर्माता को सूचित कर दे, तो चेयरपर्सन के पास बाद में किसी सदस्य की शिकायत के आधार पर उसे रिवाइजिंग कमेटी को भेजने का अधिकार नहीं होता,” अदालत ने कहा।

अदालत ने 6 जनवरी 2026 को चेयरपर्सन द्वारा जारी उस पत्र को रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया था। न्यायमूर्ति आषा ने कहा कि शिकायत “बाद में की गई असंतोषजनक प्रतिक्रिया” थी और इस तरह की शिकायतों को मान्यता देना खतरनाक मिसाल बन सकती है।

CBFC की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए आर एल सुंदरासन ने तर्क दिया कि चेयरपर्सन को समीक्षा के लिए फिल्म को भेजने का अधिकार था, विशेष रूप से जब एक्सामिनिंग कमेटी के किसी सदस्य ने आपत्ति जताई हो। उन्होंने कहा कि केवल रिलीज डेट तय हो जाने से बोर्ड पर निर्णय लेने का दबाव नहीं डाला जा सकता।

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हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जब एक्सामिनिंग कमेटी ने बहुमत से फैसला ले लिया था और वह निर्माता को सूचित किया जा चुका था, तब प्रक्रिया को दोबारा नहीं खोला जा सकता।

निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश परासरन ने कहा कि यदि 5 में से 1 सदस्य असहमत था, तो यह एक 4:1 बहुमत वाला निर्णय था और असहमति रखने वाले सदस्य की शिकायत के आधार पर पूरा प्रमाणन रद्द नहीं किया जा सकता।

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निर्देशक एच विनोद द्वारा निर्देशित ‘जन नायकन’ में विजय, प्रकाश राज, पूजा हेगड़े और ममिता बैजू मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म को 18 दिसंबर को सेंसर प्रमाणन के लिए भेजा गया था। अगले दिन, एक्सामिनिंग कमेटी ने कुछ दृश्य हटाने और कुछ संवाद म्यूट करने की सिफारिश के साथ UA प्रमाणपत्र की अनुशंसा की थी।

निर्माताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने CBFC के सभी सुझावों का पालन किया, फिर भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया और अचानक चेयरपर्सन ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेज दिया, जिससे उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।

याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म के खिलाफ शिकायत की गई थी कि यह धार्मिक भावनाएं आहत करती है। 6 जनवरी को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आषा ने मौखिक रूप से CBFC को निर्देश दिया था कि वह 7 जनवरी को वह कथित शिकायत की प्रति अदालत में प्रस्तुत करे।

अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए UA 16+ प्रमाणपत्र तुरंत जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल 6 जनवरी के पत्र को चुनौती देने तक सीमित नहीं था, बल्कि न्यायालय आवश्यकतानुसार आदेश को ‘मोल्ड’ करने के लिए सक्षम था।

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निर्णय सुनाए जाने के तुरंत बाद ASG सुंदरासन ने मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव के समक्ष अपील दायर करने की अनुमति मांगी और अनुरोध किया कि मामले को तुरंत सुना जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा, “आप अपील दाखिल कीजिए और हमें सूचित कीजिए, हम विचार करेंगे।”

यह मामला ऐसे समय में आया है जब जन नायकन और परशक्ति जैसी राजनीतिक रूप से संवेदनशील फिल्मों की रिलीज़ का इंतजार हो रहा है। परशक्ति को भाषा आंदोलन और द्रविड़ विचारधारा से प्रेरित माना जा रहा है। जन नायकन की रिलीज़ 9 जनवरी तय की गई थी, लेकिन प्रमाणन विवाद के चलते इसे स्थगित करना पड़ा।

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