दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के आगामी चुनावों की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मांग कर रहे वकीलों की याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपनी शिकायतों के निवारण के लिए चुनाव कराने के लिए गठित ‘विशेष समिति’ (Special Committee) के समक्ष आवेदन करें।
जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव से संबंधित व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान विशेष समिति द्वारा ही किया जाना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका उमेश कुमार और अन्य अधिवक्ताओं द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने अपनी एलएलबी की डिग्री प्राप्त करने के बाद अगस्त 2025 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अनंतिम (provisional) रूप से नामांकन कराया था। याचिकाकर्ताओं ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन-XX (AIBE) दिया था, जिसका परिणाम याचिका दायर करते समय तक घोषित नहीं हुआ था।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य शिकायत यह थी कि केवल AIBE परिणाम लंबित होने के कारण उनके नाम आगामी BCD चुनावों की मतदाता सूची से बाहर रखे गए हैं।
पक्षकारों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के पास अपने ऑनलाइन सत्यापन फॉर्म (Online Verification Forms) जमा कर दिए हैं। उन्होंने दलील दी कि “सभी याचिकाकर्ताओं का सत्यापन हो चुका है और उन्हें इस संबंध में व्हाट्सएप पर सूचना भी प्राप्त हो गई है।”
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (प्रतिवादी संख्या 2) के वकील श्री प्रीत पाल सिंह ने निर्देश प्राप्त करने के बाद कोर्ट को सूचित किया कि “AIBE के परिणाम आज घोषित होने की संभावना है।”
दूसरी ओर, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (प्रतिवादी संख्या 3) का प्रतिनिधित्व कर रहे श्री टी. सिंहदेव ने कोर्ट का ध्यान सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 नवंबर, 2025 को एम. वर्धन बनाम भारत संघ और अन्य (W.P.(C) No. 1319/2019) मामले में पारित आदेश की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विभिन्न बार काउंसिलों के चुनाव कराने के मामले, जिसमें उसकी रूपरेखा और समयसीमा शामिल है, पर विचार कर रहा है।
कोर्ट का विश्लेषण और अवलोकन
जस्टिस अमित बंसल ने एम. वर्धन मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भरोसा जताया, जिसके तहत राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए उच्च-स्तरीय चुनाव समितियां (High-Powered Election Committees) गठित की गई हैं। हाईकोर्ट ने नोट किया कि दिल्ली के लिए एक “विशेष समिति” गठित की गई है, जिसमें दो वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शामिल हैं, जो उच्च-स्तरीय चुनाव समिति के कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैरा 19 का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था:
“सुनवाई के दौरान, यह देखा गया है कि कई वकीलों की व्यक्तिगत और विविध शिकायतें हैं। हमें खेद है कि ऐसी व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान इन कार्यवाहियों में नहीं किया जा सकता है। इसलिए, उन्हें अपने व्यक्तिगत मुद्दों के निवारण के लिए उच्च-स्तरीय चुनाव समिति (समितियों) के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता दी जाती है।”
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को इन फैसलों में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट रूप से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैरा 20 के अनुसार:
“कोई भी व्यक्ति जो उच्च-स्तरीय चुनाव समिति के निर्णय से व्यथित है, उसे उच्च-स्तरीय पर्यवेक्षी समिति (High-Powered Supervisory Committee) से संपर्क करने की स्वतंत्रता होगी। पर्यवेक्षी समिति द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा। कोई भी सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट ऐसे निर्णय के खिलाफ किसी भी याचिका पर विचार नहीं करेगा।”
जस्टिस बंसल ने यह भी नोट किया कि दिल्ली हाईकोर्ट की एक समन्वय पीठ ने 3 दिसंबर, 2025 को सुरेंद्र कुमार बनाम बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और अन्य (W.P.(C) 18355/2025) मामले में एक समान आदेश पारित किया था, जिसमें याचिकाकर्ता को उच्च-स्तरीय चुनाव समिति से संपर्क करने का निर्देश दिया गया था।
निर्णय
सुप्रीम कोर्ट के जनादेश को देखते हुए, हाईकोर्ट ने गुण-दोष के आधार पर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे अपनी शिकायत के संबंध में “कल तक” विशेष समिति के समक्ष अभ्यावेदन (representation) प्रस्तुत करें।
- कोर्ट ने नोट किया कि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 17 जनवरी, 2026 को होना निर्धारित है।
- नतीजतन, विशेष समिति को निर्देश दिया गया कि वह 12 जनवरी, 2026 या उससे पहले याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर विचार करे और निर्णय ले।
कोर्ट ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका और लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।
केस विवरण:
- केस टाइटल: उमेश कुमार व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य
- केस नंबर: W.P.(C) 158/2026
- कोरम: जस्टिस अमित बंसल

