सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केवल ‘ऊंची कीमत की उम्मीद’ में सबसे ऊंची बोली को रद्द नहीं किया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा एक औद्योगिक प्लॉट की नीलामी को रद्द करने के फैसले को पलट दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी प्राधिकरण केवल इस उम्मीद में वैध नीलामी को रद्द नहीं कर सकता कि उसे भविष्य में और अधिक कीमत मिल सकती है, खासकर तब जब यह उम्मीद अतार्किक तुलनाओं पर आधारित हो।

6 जनवरी, 2026 को सुनाए गए इस फैसले (गोल्डन फूड प्रोडक्ट्स इंडिया बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों को खारिज करते हुए कहा कि कानून के अनुसार आयोजित नीलामी को केवल “भविष्य में ऊंची बोली की उम्मीद” के आधार पर रद्द करना सही नहीं है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 25 अगस्त, 2023 को जीडीए (GDA) द्वारा मधुबन बापूधाम योजना के तहत विज्ञापित एक नीलामी से जुड़ा है। विवाद का केंद्र प्लॉट नंबर 26 था, जो 3150 वर्ग मीटर का एक बड़ा औद्योगिक प्लॉट है।

जीडीए ने इस प्लॉट के लिए 25,600 रुपये प्रति वर्ग मीटर का रिजर्व प्राइस (आरक्षित मूल्य) तय किया था। प्रक्रिया के तहत अपीलकर्ता (गोल्डन फूड प्रोडक्ट्स इंडिया) ने तकनीकी और वित्तीय बोलियां जमा कीं। 15 मार्च, 2024 को हुई खुली नीलामी में केवल दो बोलीदाताओं ने भाग लिया। इसमें अपीलकर्ता ने 29,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की सबसे ऊंची बोली लगाई, जो रिजर्व प्राइस से 15.23% अधिक थी।

हालांकि, 22 मई, 2024 को जीडीए ने अचानक वित्तीय बोली को रद्द कर दिया और बयाना राशि (earnest money) वापस करने की सूचना दी। जीडीए का तर्क था कि उसी योजना में छोटे प्लॉट (लगभग 123 से 132 वर्ग मीटर) 82,000 रुपये से 1,21,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बिके थे, इसलिए अपीलकर्ता की बोली ‘बहुत कम’ थी।

READ ALSO  SC Reserves Verdict on Justice Yashwant Varma’s Petition Challenging In-House Probe Over Burnt Cash Row

अदालत में दलीलें

अपीलकर्ता का पक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सांघी ने तर्क दिया कि जीडीए का फैसला मनमाना था। उन्होंने कहा कि 3150 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट की तुलना 130 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट से करना अनुचित है, क्योंकि छोटे प्लॉटों की मांग हमेशा अधिक होती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इवा एग्रो फीड्स (2023) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल लिक्विडेटर या प्राधिकरण की “और अधिक पैसे मिलने की उम्मीद” किसी वैध नीलामी को रद्द करने का आधार नहीं हो सकती।

जीडीए का पक्ष: जीडीए ने तर्क दिया कि नीलामी में भाग लेने से किसी को प्लॉट पाने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। सबसे ऊंची बोली केवल एक ‘प्रस्ताव’ है जिसे स्वीकार करना या न करना प्राधिकरण के विवेक पर निर्भर है। उन्होंने जनहित और राजस्व को सुरक्षित रखने की दुहाई दी।

READ ALSO  सबरीमला मंदिर सोने मढ़ाई घोटाला: केरल हाईकोर्ट ने कहा—गंभीर अनियमितताएं, SIT को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने जीडीए के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि भले ही बड़े और छोटे दोनों प्लॉटों का रिजर्व प्राइस समान था, लेकिन बाजार में दोनों की मांग अलग-अलग होती है।

जस्टिस नागरत्ना ने फैसले में लिखा:

“महज इसलिए कि छोटे प्लॉटों के लिए ऊंची बोलियां प्राप्त हुईं, यह उम्मीद करना गलत है कि 3150 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट के लिए भी वैसी ही कीमत मिलेगी।”

अदालत ने कहा कि इस प्लॉट के लिए केवल दो बोलीदाता आए थे, जो यह दर्शाता है कि बड़े प्लॉट की मांग कम थी। ऐसे में जीडीए द्वारा की गई तुलना “अप्रासंगिक, मनमानी और तर्कहीन” थी।

READ ALSO  मवेशी तस्करी: ईडी ने टीएमसी नेता अनुब्रत मोंडल, बेटी के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया

अदालत ने नीलामी प्रक्रिया की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा:

“नीलामी प्रक्रिया की अपनी एक पवित्रता होती है। कानून के अनुसार आयोजित नीलामी में सबसे ऊंची बोली को केवल ठोस कारणों से ही खारिज किया जा सकता है… सिर्फ इसलिए कि प्राधिकरण को ऊंची बोली की उम्मीद थी, सबसे ऊंची बोली को रद्द नहीं किया जा सकता।”

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. अपीलकर्ता की बोली रद्द करने के जीडीए के फैसले को रद्द (quash) कर दिया गया है।
  2. अपीलकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह चार सप्ताह के भीतर बयाना राशि (earnest money) पुनः जमा करे।
  3. राशि जमा होने के दो सप्ताह के भीतर, जीडीए को संबंधित प्लॉट का आवंटन पत्र (allotment letter) जारी करना होगा।
  4. जीडीए को नीलामी प्रक्रिया को अपीलकर्ता के पक्ष में पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने होंगे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अपना-अपना कानूनी खर्च स्वयं वहन करेंगे।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles