EPFO वेतन सीमा में संशोधन पर केंद्र चार महीने में ले फैसला: सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने यह निर्देश सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने याचिका निपटाते हुए नौटियाल को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर केंद्र को नया प्रतिनिधित्व दें और उसके साथ आदेश की प्रति संलग्न करें। केंद्र सरकार को फिर चार महीने में इस पर निर्णय लेना होगा।

याचिका में दावा किया गया था कि EPFO की वर्तमान ₹15,000 की वेतन सीमा कई कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से बाहर कर देती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने कहा कि पिछले एक दशक में वेतन सीमा में कोई संशोधन नहीं हुआ है, जबकि केंद्र और राज्यों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम वेतन ₹15,000 से अधिक है। इससे संगठित क्षेत्र के अधिकांश कर्मचारी EPFO योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं, जो मूलतः एक सामाजिक सुरक्षा योजना है।

याचिका में कहा गया कि वेतन सीमा का संशोधन ऐतिहासिक रूप से अनियमित रहा है और यह महंगाई, न्यूनतम वेतन, प्रति व्यक्ति आय या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जैसे आर्थिक मानकों से जुड़ा नहीं रहा है।

याचिकाकर्ता ने लोकसभा की सार्वजनिक लेखा समिति और EPFO की वर्ष 2022 की एक उप-समिति की रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें वेतन सीमा में तर्कसंगत और नियमित संशोधन की सिफारिश की गई थी। जुलाई 2022 में EPFO के केंद्रीय बोर्ड ने इन सिफारिशों को मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक केंद्र सरकार ने उन पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

याचिका में यह भी कहा गया कि योजना की शुरुआत के शुरुआती 30 वर्षों में इसका ढांचा समावेशी था, लेकिन पिछले तीन दशकों में यह सीमित और बहिष्करण आधारित होता गया है। इसके कारण योजना के तहत कवर होने वाले श्रमिकों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 को संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। लेकिन वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन ₹15,000 से अधिक है, वे इस योजना में अनिवार्य रूप से शामिल नहीं किए जाते।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से सरकार पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह बदलते आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए EPFO योजना को अधिक समावेशी बनाए। अब चार महीने की समयसीमा तय होने के साथ यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।

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