पूर्व CJI पर जूता फेंकने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा और मीडिया रिपोर्टिंग के लिए नए प्रोटोकॉल मांगे

न्यायिक कार्यवाही की गरिमा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट रूम में व्यवधान को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाएं। यह निर्देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर कोर्ट रूम में जूता फेंकने की घटना के मद्देनजर आया है।

भौतिक सुरक्षा के अलावा, शीर्ष अदालत ने ऐसी घटनाओं की जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। कोर्ट ने मीडिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी विघटनकारी घटनाओं की रिपोर्टिंग को विनियमित किया जा सके।

संयुक्त सुझावों का आह्वान

जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले को गैर-विरोधात्मक (non-adversarial) मानते हुए व्यक्तिगत सजा के बजाय प्रणालीगत सुधार पर जोर दिया। कोर्ट ने केंद्र को औपचारिक नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को छोड़ते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया।

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और SCBA के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ को सूचित किया कि वे संयुक्त सुझाव प्रस्तुत करेंगे। इन सिफारिशों में मुख्य रूप से दो पहलू शामिल होंगे:

  1. निवारक उपाय: कोर्ट परिसर और बार रूम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकॉल, ताकि हमलों या व्यवधानों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
  2. मीडिया प्रोटोकॉल: ऐसी घटनाओं को प्रचारित और रिपोर्ट करने के लिए दिशानिर्देश, जिससे नकल (copycat) कृत्यों या अनावश्यक सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचा जा सके।
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CJI ने नोट किया, “सॉलिसिटर जनरल और SCBA अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से कहा है कि वे इस तरह की घटनाओं के लिए निवारक उपायों की सिफारिश करते हुए संयुक्त सुझाव देंगे, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग और प्रचार के लिए पालन किए जाने वाले प्रोटोकॉल भी प्रस्तुत करेंगे।”

अवमानना पर रोकथाम को प्राथमिकता

पीठ SCBA द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने बुजुर्ग वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने में अनिच्छा व्यक्त की। इसके बजाय, पीठ ने “अखिल भारतीय निवारक दिशानिर्देश” (pan-India preventive guidelines) स्थापित करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया।

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जस्टिस कांत ने कानूनी निकाय से व्यावहारिक समाधान प्रदान करने का आग्रह करते हुए कहा, “कोर्ट परिसर और बार रूम जैसी जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तीन-चार सुझाव देने के बारे में सोचें… जो भी करने की आवश्यकता है, हम अगली तारीख पर देखेंगे।” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले में अटॉर्नी जनरल से भी इनपुट मांगेंगे।

संदर्भ: 6 अक्टूबर की घटना

सुधार की यह मांग 6 अक्टूबर को कोर्ट की कार्यवाही के दौरान हुई एक अभूतपूर्व घटना से उत्पन्न हुई है, जब वकील राकेश किशोर ने तत्कालीन CJI बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया था।

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सुरक्षा उल्लंघन की गंभीरता के बावजूद, जस्टिस गवई विचलित नहीं हुए थे। उस समय, उन्होंने कोर्ट के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को इस व्यवधान को “नजरअंदाज” करने का निर्देश दिया और दोषी वकील को चेतावनी देकर छोड़ दिया था।

हालांकि, इस कृत्य की कानूनी बिरादरी और राजनीतिक नेतृत्व ने व्यापक निंदा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे, जिन्होंने घटना के बाद व्यक्तिगत रूप से जस्टिस गवई से बात की थी। परिणामस्वरूप, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तत्काल प्रभाव से किशोर का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में केंद्र और SCBA के संयुक्त सुझावों की समीक्षा कर नए सुरक्षा और मीडिया दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देगा।

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