“मेरी अदालत में नहीं चलेगी ‘लक्जरी लिटिगेशन’, आम आदमी के लिए आधी रात तक बैठने को तैयार”: CJI सूर्य कांत

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में अब केवल ‘लक्जरी लिटिगेशन’ (Luxury Litigation) के लिए कोई जगह नहीं है। शुक्रवार को एक सख्त संदेश देते हुए सीजेआई ने कहा कि उनकी प्राथमिकता कतार में सबसे पीछे खड़ा आम वादी है, और उसे न्याय दिलाने के लिए यदि आवश्यकता पड़ी, तो वे आधी रात तक भी अदालत चलाने को तैयार हैं।

यह टिप्पणी तब आई जब सीजेआई ने बड़े वकीलों द्वारा केवल अपने रसूख के दम पर मामलों की तत्काल सुनवाई (Urgent Listing) की मांग करने की प्रथा पर रोक लगा दी।

“बड़े वकील सिर्फ अपनी बात सुनाना चाहते हैं”

शुक्रवार की कार्यवाही के दौरान, एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक कैंटीन के विध्वंस से जुड़े मामले का विशेष उल्लेख (Mentioning) करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। इस मौखिक अनुरोध को खारिज करते हुए, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि कानूनी बिरादरी के बड़े नामों को कोई विशेष रियायत नहीं दी जाएगी।

सीजेआई ने कहा, “बड़े वकील चाहते हैं कि हम बस उन्हें सुनें। मेरी अदालत में कोई ‘लक्जरी लिटिगेशन’ नहीं होगी। मेरी प्राथमिकता सबसे पीछे बैठा सबसे छोटा वादी है और अगर जरूरत पड़ी तो मैं उनके लिए आधी रात तक यहीं रहूंगा।”

अर्जेन्ट मेंशनिंग के लिए नई प्रक्रिया लागू

24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस सूर्य कांत ने पदभार ग्रहण करते ही अदालती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने तत्काल सुनवाई की मांग करने की पुरानी परिपाटी को बदल दिया है।

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नए निर्देशों के अनुसार:

  • मामलों की तत्काल सूची के लिए अब वकीलों को लिखित में ‘मेंशनिंग स्लिप’ (Mentioning Slip) देनी होगी।
  • मौखिक अनुरोधों पर विचार केवल ‘असाधारण परिस्थितियों’ में ही किया जाएगा।
  • इन असाधारण परिस्थितियों में मुख्य रूप से मृत्युदंड (Death Penalty) या व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) से जुड़े मामले शामिल होंगे।

सीजेआई ने वकीलों को निर्देश देते हुए कहा, “यदि आपके पास कोई अत्यावश्यक उल्लेख है, तो अपनी मेंशनिंग स्लिप के साथ तात्कालिकता का कारण बताएं; रजिस्ट्रार इसकी जांच करेंगे और यदि हमें इसमें तात्कालिकता का कोई तत्व मिलता है, तो हम इसे स्वीकार करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक किसी की स्वतंत्रता या फांसी की सजा जैसे गंभीर प्रश्न शामिल नहीं होते, तब तक रजिस्ट्री ही लिखित अनुरोध के आधार पर निर्णय लेगी।

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गौरतलब है कि जस्टिस सूर्य कांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा, और उनके शुरुआती फैसलों से यह साफ है कि उनका ध्यान प्रक्रियात्मक जटिलताओं को कम करने और आम जनता के लिए न्याय सुलभ कराने पर है।

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