सुप्रीम कोर्ट: महाराष्ट्र के 57 स्थानीय निकायों में 50% से अधिक आरक्षण वाले चुनावी नतीजे अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र के उन 57 स्थानीय निकायों में होने वाले चुनावों के परिणाम, जहां कुल आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर चला गया है, अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण को लेकर चल रही सुनवाई को 28 नवंबर तक स्थगित करते हुए कहा कि जिन 57 निकायों में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है, वहां घोषित चुनावी परिणाम “प्रवर्तनाधीन कार्यवाही के अंतिम परिणाम के अधीन” माने जाएंगे।

राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) से चर्चा करने के लिए समय मांगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने अदालत को बताया कि कुल 288 स्थानीय निकायों — 242 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों — में चुनाव 2 दिसंबर को कराए जाने के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है। इनमें से 57 निकायों में आरक्षण सीमा 50% से अधिक हो गई है।

पीठ ने कहा कि इन 57 निकायों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।

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पीठ को याद दिलाया गया कि 19 नवंबर को अदालत ने राज्य से विचार करने को कहा था कि नामांकन प्रक्रिया को तब तक टाल दिया जाए जब तक 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर फैसला नहीं हो जाता।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने तर्क दिया कि मतदाताओं के धन और समय की बर्बादी रोकने के लिए चुनाव प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जुलाई 2022 में बंथिया आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देने वाले आदेश सहित अदालत के पिछले आदेशों की गलत व्याख्या की गई, जिससे भ्रम पैदा हुआ।

इस पर CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि अदालत के पास अवैध चुनाव को रद्द करने की शक्ति है।
“अगर चुनाव कानून के विपरीत कराए जाते हैं, तो उन्हें निरस्त किया जा सकता है,” मुख्य न्यायाधीश ने कहा।

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने चुनाव रोकने का विरोध किया और कहा कि अदालत पहले ही चुनाव प्रक्रिया को न्यायिक परिणाम के अधीन कर चुकी है। उन्होंने यह भी सूचित किया कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने मई 2025 के आदेश के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने 50 प्रतिशत की सीमा को संवैधानिक “लक्ष्मण रेखा” बताया।

अदालत ने यह देखते हुए कि 50 प्रतिशत सीमा लांघने वाले निकायों की संख्या को लेकर असमान आंकड़े सामने आ रहे हैं, SEC से विस्तृत सूची पेश करने को कहा।

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव 2021 से रुके हुए हैं, क्योंकि ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद लगातार जारी है।

  • दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी कोटा पर रोक लगाते हुए कहा था कि इसे केवल ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद ही लागू किया जा सकता है:
    1. ओबीसी के सामाजिक-पिछड़ेपन पर डेटा इकट्ठा करने के लिए आयोग की स्थापना
    2. आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित करना
    3. एससी, एसटी व ओबीसी का कुल आरक्षण 50% की सीमा से अधिक न होना
  • मार्च 2022 में जयंत कुमार बंथिया आयोग गठित किया गया और जुलाई 2022 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव चार महीने के भीतर कराए जाएं और ओबीसी आरक्षण वही लागू हो जो बंथिया रिपोर्ट से पूर्व का वैधानिक ढांचा मानता हो।
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पिछले सप्ताह अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसके आदेश को गलत समझा गया है और उसने कहीं भी 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की अनुमति नहीं दी।

मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। उस दिन SEC से उन सभी 288 निकायों में आरक्षण का विस्तृत डेटा प्रस्तुत करने की उम्मीद है।

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