दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में आरोपी वकील को आत्मसमर्पण के लिए 17 नवंबर तक का समय दिया; न्यायिक अधिकारियों की भूमिका पर जताई कड़ी चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महिला अधिवक्ता द्वारा दर्ज कराए गए बलात्कार मामले में आरोपी 51 वर्षीय वकील को आत्मसमर्पण करने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाकर 17 नवंबर कर दी।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 7 नवंबर को आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करते हुए उसे एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। अदालत ने दोहराया कि आरोपी महिला अधिवक्ता से किसी भी तरह का संपर्क नहीं करेगा, और यदि वह ऐसा करता है तो दिल्ली पुलिस उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने समय बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि जमानत रद्द किए जाने के आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है और यह मामला सोमवार को सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेखित किया जाएगा।

अदालत ने सीमित राहत देते हुए आत्मसमर्पण की समयसीमा 17 नवंबर तक बढ़ा दी।

पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करते हुए कहा था कि मामले में “कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप” एक महत्वपूर्ण कारण था।

READ ALSO  धारा 18 (3) जेजे एक्ट | मजिस्ट्रेट के पास आरोपी को किशोर घोषित करने के बाद फ़ाइल को अपने पास रखने या ट्रायल की कोई शक्ति नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने दो न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक जांच का आदेश भी दिया, जिन पर महिला अधिवक्ता को अपनी शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डालने का आरोप है।

अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में न्यायिक अधिकारियों की कथित संलिप्तता “चौंकाने वाली” है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भले ही आरोपों की आगे जांच होनी है, लेकिन वे “आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रति गंभीर असम्मान” का संकेत देते हैं।

READ ALSO  यमुना प्रदूषण: एनजीटी का कहना है कि सीवेज उत्पादन और उपचार में अंतर को युद्धस्तर पर दूर करने की जरूरत है

27 वर्षीय महिला वकील ने अपनी शिकायत में कहा कि वह एक मित्र के माध्यम से आरोपी से मिली थीं और एक पार्टी के लिए उसके घर गई थीं, जहां आरोपी ने उसके साथ बलात्कार किया। उनका कहना है कि आरोपी, जो विधुर है, ने विवाह का आश्वासन दिया और भावनात्मक दबाव डालकर संबंध बनाए रखे। वह मई में गर्भवती हो गईं।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के कुछ न्यायिक अधिकारियों से करीबी संबंध हैं, जिन्होंने एफआईआर से पहले और बाद में उस पर दबाव डालने की कोशिश की।

महिला के वकील ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद एक न्यायिक अधिकारी ने उसे फोन कर मेडिकल परीक्षण न कराने की सलाह दी।

उनका कहना था कि उसी अधिकारी ने समझौते का प्रस्ताव रखा और बताया कि उसके लिए 30 लाख रुपये रखे गए हैं। वकील ने दावा किया कि अधिकारी ने उसे बयान को नरम करने के लिए मजबूर किया और कहा कि ऐसा करने पर आरोपी उसे और अधिक मुआवज़ा देगा।

READ ALSO  Supreme Court Seeks ECI Response by Dec 1 on Challenges to Special Intensive Revision of Electoral Rolls in Kerala, Tamil Nadu, West Bengal

हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई प्रशासनिक जांच जारी है। बलात्कार के आरोपों की आपराधिक जांच भी आगे बढ़ रही है।

आरोपी को 17 नवंबर तक ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद मामले की अगली कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles