हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एनएचएआई को लगाई फटकार, कहा – परवाणू-चंबाघाट-कैथलीघाट-ढल्ली फोरलेन परियोजना में देरी और खराब रखरखाव अस्वीकार्य

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को परवाणू-चंबाघाट-कैथलीघाट-ढल्ली फोरलेन परियोजना में अत्यधिक देरी और राजमार्ग के खराब रखरखाव को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर खामियां दूर नहीं की गईं, तो सनवाड़ा टोल प्लाजा पर टोल वसूली पर रोक जारी रहेगी।

मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि भले ही एनएचएआई ने परियोजना के “अधिकांश हिस्से के पूरा होने” का दावा किया हो, लेकिन वास्तव में यह कार्य छह साल से अधिक की देरी से चल रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि कंडाघाट, दतयार और चक्की के पास राजमार्ग के कई हिस्से अभी भी “दयनीय स्थिति” में हैं, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

गुरुवार को जारी आदेश में अदालत ने कहा कि सड़क किनारे की नालियों का रखरखाव और पहाड़ी ढलानों से मलबा हटाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सड़क को और नुकसान से बचाया जा सके। अदालत ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि जवाबदेही की गंभीर कमी को भी दर्शाती है।

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कोर्ट ने अमाइकस क्यूरी गणेश बरौवालिया द्वारा दी गई सक्रिय सहायता की सराहना की और कहा कि उन्होंने राज्यभर में राजमार्ग निर्माण और रखरखाव में जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

गौरतलब है कि 18 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने खराब सड़क स्थिति और यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी को देखते हुए सनवाड़ा टोल प्लाजा पर टोल वसूली निलंबित करने का आदेश दिया था। परवाणू–शिमला हाइवे पर अक्सर भूस्खलन, जाम और रास्ता बंद होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल उठे।

अदालत ने एनएचएआई से 30 अक्टूबर तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, जिसमें परियोजना पर काम करने वाले ठेकेदारों का विवरण और गुणवत्ता सुधार के उपाय शामिल हों। साथ ही, सालोगढ़ के पास पुल की सुरक्षा और स्थिरता पर रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें पिलर्स की स्थिति और मरम्मत की लागत का उल्लेख हो।

3 नवंबर को दायर नवीनतम रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए अदालत ने अगली सुनवाई 11 नवंबर के लिए तय की है और चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में सुधार नहीं किया गया तो अदालत सख्त रुख अपनाएगी।

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