सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बाद प्रोविजनल आंसर की जारी करने के UPSC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई संतुष्टि, कहा— “बहुत सकारात्मक कदम”

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बाद प्रोविजनल आंसर की (provisional answer key) प्रकाशित करने के फैसले का स्वागत किया और इसे “बहुत सकारात्मक” तथा “अच्छा विकास” करार दिया।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ सिविल सेवा अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें आयोग को प्रारंभिक परीक्षा के बाद आंसर की, कट-ऑफ मार्क्स और अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, “हमने कुछ खबर पढ़ी है।” वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता, जिन्हें अदालत ने इस मामले में अमिकस क्यूरी (amicus curiae) नियुक्त किया था, ने UPSC द्वारा दायर हालिया हलफनामे का हवाला दिया।

पीठ ने कहा, “कुछ बहुत सकारात्मक हुआ है” और आगे जोड़ा, “हमें यह जानकर खुशी है कि UPSC ने इस संबंध में निर्णय लिया है।” इसके बाद अदालत ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया, साथ ही याचिकाकर्ताओं को उपयुक्त राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता दी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि परीक्षा में “गलत प्रश्न” आने के कारण अभ्यर्थियों को कई वर्षों का नुकसान हुआ है, इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सिब्बल ने यह भी अनुरोध किया कि याचिकाकर्ताओं को एक और अवसर दिया जाए।

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इस मामले में अग्रणी याचिका अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे के माध्यम से दायर की गई थी। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित रूप से गलत प्रश्नों से जुड़ी याचिकाओं पर विचार किया है।

UPSC ने पिछले महीने दाखिल अपने हलफनामे में बताया था कि विभिन्न पहलुओं पर “व्यापक विचार-विमर्श” के बाद और एक संवैधानिक संस्था के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:

  • प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन के बाद प्रोविजनल आंसर की प्रकाशित करना।
  • अभ्यर्थियों से आपत्तियां/प्रतिनिधित्व आमंत्रित करना, जिनमें प्रत्येक आपत्ति के साथ तीन प्रामाणिक स्रोतों का हवाला देना अनिवार्य होगा
  • जिन आपत्तियों में प्रामाणिक स्रोत नहीं होंगे, उन्हें प्रारंभ में ही खारिज किया जाएगा।
  • आपत्तियों और प्रोविजनल आंसर की को विषय विशेषज्ञों की टीम के समक्ष रखा जाएगा, जो गहराई से विचार कर अंतिम आंसर की तैयार करेगी।
  • अंतिम आंसर की ही प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों की घोषणा का आधार बनेगी।
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आयोग ने कहा कि वह इन प्रक्रियाओं को “यथाशीघ्र” लागू करने की इच्छा रखता है। हलफनामे में कहा गया, “UPSC का यह निर्णय याचिकाओं में उठाई गई शिकायतों के प्रभावी और पर्याप्त निवारण के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाने और जनहित को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।”

UPSC के इस निर्णय को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया, यह मानते हुए कि आयोग का कदम अभ्यर्थियों की प्रमुख चिंताओं को दूर करता है।

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गौरतलब है कि UPSC देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, सिविल सेवा परीक्षा सहित कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं का आयोजन करता है।

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