हिरासत में मौत का मामला: दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI और मध्य प्रदेश सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश में 24 वर्षीय युवक की कथित हिरासत में मौत के मामले में शामिल दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी में देरी पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राज्य सरकार से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गिरफ्तारी तभी हुई जब पीड़ित की मां ने अवमानना याचिका दायर की और अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि मई में ही गिरफ्तारी का आदेश दे दिया गया था, लेकिन दोनों अधिकारियों को महीनों तक गिरफ्तार नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “इन सभी दिनों में क्या हुआ? आप उन्हें क्यों नहीं पकड़ सके? हमें लगभग आपके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करनी पड़ी, तब जाकर आपने कार्रवाई की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का यह तरीका नहीं है। गिरफ्तारी के लिए तीन-न्यायाधीशों की पीठ का आदेश था।”

पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई की गई है। “दोनों ने इस अदालत के गिरफ्तारी के आदेश के बावजूद अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई? उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई?” अदालत ने सवाल किया।

सीबीआई की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने अदालत को सूचित किया कि दोनों अधिकारियों को अब गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तम सिंह को 27 सितंबर को इंदौर में गिरफ्तार किया गया, जबकि संजीव सिंह को 5 अक्टूबर को शिवपुरी में हिरासत में लिया गया। दोनों फिलहाल इंदौर जेल में बंद हैं।

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पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई का विवरण पेश करे। अब मामला 6 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

यह मामला पीड़ित की मां द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के 15 मई के आदेश का पालन नहीं किया गया। उस दिन शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

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नए जांच अधिकारी ने 30 जून को मामले की कमान संभाली और 2 जुलाई को एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया, जिसके खिलाफ चश्मदीदों ने हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

25 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि दोनों पुलिसकर्मियों को अप्रैल से फरार रहने के बावजूद न तो गिरफ्तार किया गया और न ही निलंबित। बाद में सीबीआई ने अदालत को बताया कि दोनों अधिकारियों को 1 अक्टूबर को निलंबित किया गया है।

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इससे पहले की सुनवाइयों में भी अदालत ने सीबीआई की निष्क्रियता पर सख्त टिप्पणी की थी और चेतावनी दी थी कि आदेशों की अवहेलना पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

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