महिला जज को ‘चपरासी’ कहना वकील को पड़ा महंगा, हाईकोर्ट ने शुरू की अवमानना की कार्यवाही

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है, जिस पर खंडवा जिला न्यायालय में एक महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) के साथ अभद्रता करने और उन्हें “चपरासी” कहने का आरोप है। खंडवा के प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा मामला भेजे जाने के बाद हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने वकील के आचरण पर गंभीर रुख अपनाया है।

के एक वकील को एक महिला जज के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के कारण मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की खंडपीठ अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले इस मामले में आपराधिक अवमानना की सुनवाई कर रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह घटना 22 अप्रैल, 2025 को खंडवा जिला न्यायालय में एक महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में हुई। प्रधान जिला न्यायाधीश, खंडवा द्वारा हाईकोर्ट को भेजे गए संदर्भ (reference) के अनुसार, आरोपी वकील चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में पैरवी कर रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब सुनवाई के लिए पहली बार मामले का नाम पुकारा गया तो वकील अदालत में मौजूद नहीं थे। जब वह बाद में पेश हुए, तो मजिस्ट्रेट ने उनसे ‘तलवाना’ प्रस्तुत करने के लिए कहा। आरोप है कि जज के इस निर्देश से वकील नाराज हो गए और उन्होंने अपना आपा खोते हुए पीठासीन न्यायिक अधिकारी के लिए “चपरासी” जैसे अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया।

इस आचरण को न्यायपालिका को बदनाम करने और उसके अधिकार को कम करने वाला मानते हुए, प्रधान जिला न्यायाधीश ने इसे आपराधिक अवमानना का मामला मानते हुए कार्यवाही के लिए हाईकोर्ट को एक संदर्भ भेजा।

हाईकोर्ट की कार्यवाही

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस संदर्भ पर स्वतः संज्ञान लेते हुए वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज कर लिया।

शुरुआत में, वकील को पेश होने के लिए एक नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसकी तामील नहीं हो सकी। इसके बाद, हाईकोर्ट ने एक नया नोटिस जारी करते हुए वकील को अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

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23 सितंबर, 2025 को, वकील चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। बताया गया है कि इस दौरान वकील ने अदालत के समक्ष सम्मानजनक आचरण प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट अब इस मामले में आगे की सुनवाई कर रहा है ताकि वकील के कथित कदाचार के लिए उचित कार्रवाई तय की जा सके।

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