कर्नाटक हाईकोर्ट ने गिग वर्कर्स कानून की बाइक टैक्सी पर लागू होने को लेकर उठाए सवाल

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य में हाल ही में पारित गिग वर्कर्स कानून की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह कानून बाइक टैक्सी संचालकों की चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित करता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार जल्द ही स्पष्ट नियम नहीं बनाती, तो बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगे प्रतिबंध को स्थगित किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सी.एम. जोशी की खंडपीठ ओला (एएनआई टेक्नोलॉजीज), उबर, रैपिडो, व्यक्तिगत राइडर्स और बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन की उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें स्पष्ट नियामक ढांचा बनने तक बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने अदालत को बताया कि सरकार ने हाल ही में कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया है। यह कानून 12 सितंबर से प्रभावी हुआ है और डिलीवरी वर्कर्स एवं राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी लाभ प्रदान करता है।

हालांकि, पीठ ने सवाल किया कि क्या यह कानून दोपहिया टैक्सी चालकों पर स्पष्ट रूप से लागू होता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “एक महीने का समय नीति बनाने के लिए दिया गया था, लेकिन कुछ नहीं किया गया। आपने गिग वर्कर्स के लिए कानून बनाया—क्या यह बाइक टैक्सियों पर लागू होता है? यदि स्पष्टता नहीं मिली, तो हम रोक पर पूर्ण स्थगन देने को इच्छुक हैं।”

महाधिवक्ता शेट्टी ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध के बावजूद कैब एग्रीगेटर्स ने बाइक टैक्सी सेवाएं जारी रखीं, जो अदालत की अवमानना है। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत राइडर्स के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।

वरिष्ठ अधिवक्ता ध्यान चिनप्पा ने बाइक टैक्सी मालिकों की ओर से अंतरिम राहत देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी चालकों की स्थिति दयनीय है क्योंकि ऑटो चालकों के विपरीत उनके पास वाहनों को खड़ा करने के लिए कोई निर्धारित स्टैंड नहीं है।

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत के ताजा अवलोकन से यह संभावना बनी हुई है कि यदि सरकार कानून की बाइक टैक्सियों पर लागू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तो राइडर्स और एग्रीगेटर्स को राहत मिल सकती है।

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