सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ईडी से जवाब, एम3एम निदेशक रूप बंसल की याचिका वापस लेने की अर्जी पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रियल एस्टेट कंपनी एम3एम के निदेशक रूप बंसल की उस अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से लंबित याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी। यह याचिका उनके खिलाफ दर्ज रिश्वतखोरी मामले को रद्द करने से जुड़ी थी।

जस्टिस एम.एम. सुन्दरश और जस्टि सतीश चंद्र शर्मा की पीठ बंसल की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने 27 अगस्त को हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने बिना ईडी की राय सुने उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। यह मामला अब 13 अक्टूबर को हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बंसल की ओर से दलील दी कि वह याचिका बिना किसी शर्त के वापस लेना चाहते हैं और किसी प्रकार की छूट (liberty) नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया—“जब मैं बिना शर्त वापस लेना चाहता हूँ तो हाई कोर्ट ईडी का जवाब क्यों मांग रहा है?”

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इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “यदि कोई व्यक्ति याचिका वापस लेना चाहता है तो वह इतनी जल्दी में क्यों होगा, जब तक कि उसे यह आशंका न हो कि ईडी का हलफ़नामा उसके खिलाफ कुछ उजागर कर देगा।” अदालत ने मामले की सुनवाई अक्टूबर में करने पर सहमति जताई। हालांकि, सिंघवी ने आग्रह किया कि अगली हाई कोर्ट की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट इसे ले।

ईडी ने हाई कोर्ट में कहा था कि बंसल बार-बार याचिकाएँ दाखिल कर उन्हें वापस लेते हैं। यह आचरण “बेंच हंटिंग” और फोरम शॉपिंग की श्रेणी में आता है। बेंच हंटिंग का अर्थ है किसी विशेष जज या पीठ के समक्ष मामला लाने की कोशिश करना ताकि अनुकूल आदेश मिल सके।

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इससे पहले मई में, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने मौखिक रूप से बेंच हंटिंग की संभावना जताई थी और फिर खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। अब यह मामला जस्टिस मंजरी नेहरू कौल के पास लंबित है। वहीं, 4 अगस्त को पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल ने बेंच हंटिंग के आरोपों की जांच के लिए समिति बनाई और इस मामले में जुड़े 16 वकीलों, जिनमें कुछ वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं, को नोटिस जारी किया।

बंसल पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व विशेष न्यायाधीश सुधीर परमार को अप्रत्यक्ष रूप से रिश्वत देने की कोशिश की। हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अप्रैल 2023 में बंसल और परमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

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ईडी, जिसने बंसल को जून 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था, ने आरोप लगाया कि परमार के भतीजे और अन्य परिजनों को अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच ₹1.3 करोड़ मिले, जब बंसल पर आरोप तय किए जाने थे। इसके बाद परमार को अप्रैल 2023 में निलंबित कर दिया गया।

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में अक्टूबर में फिर से सुना जाएगा, जबकि हाई कोर्ट में कार्यवाही समानांतर रूप से जारी रहेगी।

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