सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक रियल्टर्स को सुपरनोवा प्रोजेक्ट में तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने से रोका

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुपरटेक रियल्टर्स और उसके निलंबित निदेशक राम किशोर अरोड़ा को नोएडा स्थित महत्वाकांक्षी सुपरनोवा प्रोजेक्ट में किसी भी तरह के तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने से रोक दिया। 80 मंज़िला और 300 मीटर ऊँचाई वाला यह मिश्रित उपयोग वाला प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊँची इमारत बनने का दावा करता है।

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने साथ ही नोएडा प्राधिकरण को भी मामले में पक्षकार बनाया।

पीठ ने अरोड़ा और उनके सहयोगियों को परियोजना की किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने से रोका। अदालत ने यह भी कहा कि अरोड़ा को दिवाला समाधान प्रक्रिया की निगरानी कर रहे अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) के साथ पूरा सहयोग करना होगा और सभी रिकॉर्ड्स डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने होंगे।

पीठ ने कहा, “अपीलकर्ता को निर्देशित किया जाता है कि वह IRP के साथ सहयोग करें और आवश्यकतानुसार सभी दस्तावेज/रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं।”

सुपरनोवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (SNAOA) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर और अधिवक्ता गोविंद जी ने अदालत को बताया कि सुपरटेक रियल्टर्स कुछ संपत्तियों को अलग से बेचने की कोशिश कर सकता है, इसलिए नोएडा प्राधिकरण को पक्षकार बनाया जाना ज़रूरी है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया।

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एक अन्य समूह के खरीदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सुपरनोवा परियोजना 70% पूरी हो चुकी है और इसे अम्रपाली या यूनिटेक जैसी रुकी हुई परियोजनाओं से तुलना नहीं की जानी चाहिए।

हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने पहले ही सह-विकासकर्ता (co-developer) लाने का सुझाव दिया है ताकि परियोजना में पारदर्शी तरीके से पूंजी लगाई जा सके, वरना यह मामला सीबीआई जांच योग्य होता।

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अमिकस क्यूरी राजीव जैन ने अपनी 721 पन्नों की रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि इस परियोजना को पूरा करने के लिए अदालत-निगरानी वाली हाइब्रिड समाधान प्रणाली अपनाई जाए, जैसी अम्रपाली और यूनिटेक मामलों में अपनाई गई थी। उन्होंने इसकी निगरानी के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस नवीन सिन्हा और पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम. एम. कुमार के नाम सुझाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “जब सामान्य दिवाला प्रक्रिया घर खरीदारों की रक्षा करने में असफल होती है, तब न्यायपालिका ने नवाचार करने में संकोच नहीं किया है।”

जैन ने यह भी सुझाव दिया कि प्रमोटर को नियंत्रण से बाहर किया जाए और उसकी भूमिका केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित रखी जाए। साथ ही, कंपनी के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट एक प्रतिष्ठित और अनुभवी संस्था से कराया जाए।

सुपरटेक लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी सुपरटेक रियल्टर्स सुपरनोवा प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही है, जिसमें आवासीय, वाणिज्यिक, कार्यालय, स्टूडियो अपार्टमेंट, सर्विस अपार्टमेंट और शॉपिंग सेंटर शामिल हैं।

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बैंक ऑफ महाराष्ट्र की याचिका पर दिवाला प्रक्रिया शुरू की गई थी। जून 2023 में दिल्ली बेंच एनसीएलटी ने कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने का आदेश दिया, जिसे 13 अगस्त 2025 को एनसीएलएटी ने भी बरकरार रखा। अरोड़ा ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक रियल्टर्स और अरोड़ा को अमिकस की रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने की अनुमति दी और अगली सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर 2025 तय की।

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