दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने गौतम गंभीर की याचिका का किया विरोध, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और पूर्व बीजेपी सांसद गौतम गंभीर तथा उनकी फाउंडेशन की उस याचिका का कड़ा विरोध किया, जिसमें उन्होंने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान फैबिफ्लू दवा के कथित अवैध भंडारण और वितरण से जुड़े मामले को रद्द करने की मांग की थी। विभाग ने कहा कि आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए मुकदमा चलाना “अनिवार्य” है।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकलपीठ ने गंभीर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन को चुनौती देने के साथ-साथ मामले को पूरी तरह से रद्द करने की मांग करती है। विभाग की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि गंभीर ने सीधे हाईकोर्ट का रुख किया जबकि उन्हें पहले सत्र न्यायालय (सेशंस कोर्ट) जाना चाहिए था।

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विभाग के वकील ने कहा, “ये लोग समन आदेश को चुनौती दे रहे हैं। यह आदेश संशोधित किया जा सकता है, इसलिए उन्हें सत्र न्यायालय जाना चाहिए था। आरोपों की सच्चाई तय करने के लिए मुकदमा चलना ज़रूरी है।”

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जुलाई 2021 में विभाग ने गंभीर, उनकी पत्नी नताशा, मां सीमा, गौतम गंभीर फाउंडेशन और इसकी सीईओ अपराजिता सिंह के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18(सी) और 27(बी)(ii) के तहत शिकायत दर्ज की थी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट की उस बेंच के आदेश पर हुई थी, जिसमें महामारी के दौरान अवैध रूप से दवाओं का भंडारण और वितरण करने वालों की जांच के निर्देश दिए गए थे।

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धारा 18(सी) बिना लाइसेंस दवा के निर्माण, बिक्री और वितरण को प्रतिबंधित करती है, जबकि धारा 27(बी)(ii) इसके उल्लंघन पर न्यूनतम तीन साल और अधिकतम पांच साल की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान करती है।

इस साल 26 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने गंभीर को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

गंभीर ने हाईकोर्ट में कहा कि उन्होंने दवाएं ज़रूरतमंद लोगों को मुफ्त में बांटी थीं, न कि मुनाफा कमाने के लिए बेचीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को बेवजह मामले में घसीटा गया है।

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सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, लेकिन यह रोक इस साल 9 अप्रैल को हटा दी गई। हाल ही में अदालत ने गंभीर को “नाम उछालने” (name-dropping) से सावधान रहने की नसीहत देते हुए आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया।

अब हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है कि कार्यवाही रद्द की जाएगी या ट्रायल आगे बढ़ेगा।

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