सुप्रीम कोर्ट ने WBSSC को एक हफ्ते में दोषी शिक्षकों की सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) को निर्देश दिया है कि वह सात दिनों के भीतर उन शिक्षकों की सूची प्रकाशित करे जिनकी नियुक्तियां 2016 की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और हेरफेर के कारण रद्द कर दी गई थीं।

यह आदेश उच्च माध्यमिक (कक्षा 11–12) के शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ताओं को आगामी भर्ती परीक्षा में बैठने के लिए पात्र घोषित किया गया था, लेकिन उन्होंने WBSSC की 30 मई की अधिसूचना को चुनौती दी। उनका आरोप था कि अधिसूचना अस्पष्ट है और इससे दोषी उम्मीदवारों को भी नई परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सकता है।

सुनवाई के दौरान WBSSC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पहले कहा कि दोषियों की सूची तैयार कर ली गई है, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है। आयोग के इस बदले हुए रुख पर आपत्ति जताते हुए पीठ ने पूछा कि क्या आयोग परीक्षा (7 और 14 सितंबर) से पहले सूची सार्वजनिक करने के लिए तैयार है। अंततः बनर्जी ने सहमति जताई, जिसे अदालत ने अपने आदेश में दर्ज कर लिया।

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निर्दोष शिक्षकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अभिजीत उपाध्याय ने दलील दी कि 30 मई की अधिसूचना में आयु और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी नई शर्तें लगाई गई हैं, जो उनके मुवक्किलों पर लागू नहीं होनी चाहिए। अदालत ने इन दलीलों पर गौर करते हुए WBSSC से प्रतिवाद दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर तय की।
इससे पहले 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोष शिक्षकों को 31 दिसंबर 2025 तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी थी और राज्य को तब तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था।

WBSSC घोटाले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। 3 अप्रैल के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि “बड़े पैमाने पर की गई हेरफेर और धांधली, तथा उसके बाद छिपाने के प्रयास ने चयन प्रक्रिया को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।”
CBI की जांच में सामने आया कि उम्मीदवारों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं को पैसे देकर नौकरी हासिल की थी। कई चयनित उम्मीदवारों ने खाली उत्तरपुस्तिका जमा की थी या फिर मनमाने तरीके से उनकी रैंकिंग बढ़ा दी गई थी।

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WBSSC ने माना है कि कम से कम 15,800 निर्दोष उम्मीदवार नई प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र हैं। वहीं, राज्य सरकार की 3 अप्रैल के आदेश की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को खारिज कर दिया और कहा कि भर्ती की निष्पक्षता की रक्षा करना निर्दोष नियुक्त शिक्षकों की पीड़ा से अधिक महत्वपूर्ण है।

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