कर्नाटक हाईकोर्ट ने BJP MLC एन. रविकुमार को अंतरिम राहत दी, मुख्य सचिव पर कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज आपराधिक मामले में रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य और विपक्ष के व्हिप एन. रविकुमार को एक आपराधिक मामले में अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। यह मामला राज्य की मुख्य सचिव शालिनी राजनीश के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर दर्ज किया गया था।

न्यायमूर्ति एस.आर. कृष्ण कुमार ने आदेश दिया कि 8 जुलाई तक रविकुमार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, जब उनकी FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होनी है। इस बीच अदालत ने BJP नेता को पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।

रविकुमार ने विधानसौधा के पास एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर मुख्य सचिव पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता नागरथ्ना की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 351(3) (आपराधिक भय पैदा करना), 75(3) (यौन उत्पीड़न), और 79 (किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने हेतु इशारा या शब्द) के तहत FIR (अपराध संख्या 66/2025) दर्ज की।

कर्नाटक IAS अधिकारियों के संघ ने रविकुमार के बयान की निंदा करते हुए इसे “अश्लील, मानहानिपूर्ण और मुख्य सचिव तथा सिविल सेवा की गरिमा पर सीधा हमला” बताया।

रविकुमार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “मैंने मुख्य सचिव के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है।”

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रविकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और BJP विधायक की छवि खराब करने के लिए दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल जानबूझकर उनके मुवक्किल के शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है।

रविकुमार की ओर से अधिवक्ता सुयोग हेरेले के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि FIR एक ऐसे व्यक्ति द्वारा देर से दर्ज कराई गई है जिसका घटनाक्रम से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक हित साधना है।

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वहीं, विशेष लोक अभियोजक बी.ए. बेलियप्पा ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच पर रोक लगाना पुलिस का मनोबल गिराएगा और गलत संदेश देगा। उन्होंने कहा, “सभी महिला IAS अधिकारी इसका विरोध कर रही हैं,” और रविकुमार द्वारा पूर्व में दिए गए विवादास्पद बयानों की ओर भी इशारा किया।

राज्य सरकार की आपत्ति के बावजूद, हाईकोर्ट ने रविकुमार को अंतरिम राहत देते हुए पुलिस को अगली सुनवाई (8 जुलाई) तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से रोक दिया है।

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