गेटवे ऑफ इंडिया जेट्टी प्रोजेक्ट: बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती, 27 मई को होगी सुनवाई

मुंबई के प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ इंडिया के पास बन रहे विवादास्पद पैसेंजर जेट्टी और टर्मिनल प्रोजेक्ट को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा निर्माण रोकने से इनकार किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है। याचिका पर 27 मई को शीर्ष अदालत में सुनवाई निर्धारित है।

यह याचिका कफ परेड रेजिडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष लॉरा डीसूजा ने अधिवक्ता अनघा एस. देसाई (देसाई लीगल एलएलपी) के माध्यम से दाखिल की है। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 और 8 मई के आदेशों को चुनौती दी गई है, जिसमें कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट से संबंधित निर्माण, विध्वंस या किसी भी प्रकार के परिवर्तनात्मक कार्यों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

डीसूजा ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस प्रोजेक्ट से होने वाले व्यापक जनहित और अपूरणीय नुकसान की अनदेखी की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट की शुरुआत बिना किसी सार्वजनिक सूचना, परामर्श या स्थानीय निवासियों से चर्चा के की गई। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी कि याचिकाकर्ताओं ने परियोजना के बारे में पहले से जानकारी होते हुए भी देर से याचिका दाखिल की, अनुचित है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि परियोजना को जिन विभागीय अनुमतियों, अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) और पर्यावरणीय आकलन रिपोर्टों के आधार पर मंजूरी दी गई है, वे सभी तय प्रक्रियाओं और नियमों के उल्लंघन में दी गई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल सरकार के “जनहित” के दावे को आधार बनाकर निर्माण कार्य की अनुमति दे दी, जबकि अंतरिम राहत देने के लिए जरूरी कानूनी परीक्षण—प्रथम दृष्टया मामला, संतुलन की सुविधा और अपूरणीय क्षति की संभावना—का सही आकलन नहीं किया गया।

“हाईकोर्ट का आदेश इस विशाल निर्माण से गेटवे ऑफ इंडिया जैसे धरोहर स्मारकों और आसपास के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले अपूरणीय प्रभाव को ठीक से नहीं दर्शाता,” याचिका में कहा गया है। इसमें आगे कहा गया है कि 15.5 एकड़ समुद्री क्षेत्र में फैली इस परियोजना से कोलाबा के तटीय स्वरूप और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

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इस प्रोजेक्ट के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी भारी विरोध हो रहा है। कफ परेड रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अलावा बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब, स्थानीय व्यापारी, पर्यटक और संसद के दोनों सदनों के कई जनप्रतिनिधि इस प्रोजेक्ट को प्रिंसेस डॉक स्थानांतरित करने की मांग कर चुके हैं। एक व्यवहार्यता रिपोर्ट में भी प्रिंसेस डॉक को बेहतर और कम विघ्नकारी स्थान बताया गया है।

याचिका में सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। इसमें 18 दिसंबर 2024 की उस घटना का उल्लेख है, जब गेटवे ऑफ इंडिया के पास भारतीय नौसेना की एक स्पीडबोट पैसेंजर फेरी ‘नीलकमल’ से टकरा गई थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। याचिका का कहना है कि उसी क्षेत्र में नया जेट्टी बनने से समुद्री ट्रैफिक और अधिक बढ़ेगा, जिससे भविष्य में ऐसे हादसों की आशंका और भी बढ़ जाएगी।

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“यह प्रोजेक्ट जनहित के नाम पर कुछ विशेष लोगों के लाभ के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। यदि इसे अनुमति दी गई, तो यह न केवल कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करेगा, बल्कि जनजीवन को खतरे में डालेगा और मुंबई के ऐतिहासिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र को स्थायी नुकसान पहुंचाएगा,” डीसूजा ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल इस परियोजना के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि सार्वजनिक हित, पर्यावरण संरक्षण और धरोहर संरचना संरक्षण के लिए भी नजीर बन सकता है।

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