दिल्ली स्कूलों में बम की धमकियों पर SOP न बनाने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राजधानी के स्कूलों में बम धमकियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने में विफल रहने के आरोप में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया।

न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने इस मामले को “गंभीर” करार देते हुए कहा कि फर्जी धमकियों की बार-बार पुनरावृत्ति से बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों को भारी मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। उन्होंने इस पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता जताई।

यह अवमानना याचिका अधिवक्ता अर्पित भार्गव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि दिल्ली सरकार और पुलिस ने 14 नवंबर 2024 को कोर्ट द्वारा जारी आदेश का पालन नहीं किया। उस आदेश में आठ सप्ताह के भीतर SOP और विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका में कहा गया कि निर्धारित अवधि 14 जनवरी 2025 को समाप्त हो गई, लेकिन अब तक कोई कार्य योजना न तो तैयार की गई और न ही लागू की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बिनाशॉ एन. सोनी ने दलील दी कि अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेशों की स्पष्ट अवहेलना की गई है और सार्वजनिक हित की उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि SOP की अनुपस्थिति के कारण दिल्ली के स्कूल बार-बार मिलने वाली बम धमकियों के सामने असुरक्षित बने हुए हैं।

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याचिका में कहा गया, “इन धमकियों की सच्चाई चाहे जो भी हो, इनसे बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों में भय और घबराहट का माहौल बनता है। एक मानकीकृत प्रतिक्रिया तंत्र की अनुपस्थिति से न केवल सुरक्षा संकट उत्पन्न होता है, बल्कि लाखों स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।”

कोर्ट को यह भी बताया गया कि दिल्ली में 4,600 से अधिक स्कूल हैं, जबकि केवल 5 बम निष्क्रिय दस्ते और 18 बम पहचान टीमें ही मौजूद हैं — जो इस खतरे से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं।

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गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने यह मुद्दा 2023 में तब उठाया था जब दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड को एक फर्जी बम धमकी मिली थी। इसके बाद कई अन्य स्कूलों को भी इसी प्रकार की धमकियां मिलीं, जिनमें से अधिकांश बाद में फर्जी पाई गईं। कई मामलों में इन धमकियों को डार्क वेब या VPN के जरिए भेजा गया था।

कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए अपने आदेश में कहा था कि SOP में पुलिस, स्कूल प्रशासन और नगर निकायों की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

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कोर्ट ने अब संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई के लिए 19 मई 2025 को उपस्थित होने का निर्देश दिया है और इस दौरान SOP तथा कार्य योजना की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है।

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