केरल हाईकोर्ट में कोर्ट फीस वृद्धि के विरोध में वकील बुधवार को करेंगे हड़ताल

केरल हाईकोर्ट के वकील बुधवार, 9 अप्रैल को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल 2025 के हाल ही में पारित केरल वित्त विधेयक के तहत कोर्ट फीस में की गई भारी वृद्धि के खिलाफ की जा रही है। यह संशोधित फीस 1 अप्रैल से लागू कर दी गई है, जिसके बाद वकीलों और विधिक समुदाय में तीव्र असंतोष देखने को मिला है।

केरल हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ (KHCAA) ने ‘पेन डाउन’ विरोध का आह्वान किया है, जिसके तहत वकील उक्त तिथि को किसी भी न्यायिक कार्य में भाग नहीं लेंगे। संघ का कहना है कि कोर्ट फीस में 400% से लेकर 9900% तक की वृद्धि न केवल वादकारियों पर अनावश्यक बोझ डालती है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत न्याय प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन करती है।

मुख्य न्यायाधीश नितिन एम जमदार को लिखे एक मार्मिक पत्र में KHCAA ने कहा, “हम माननीय न्यायालय से आग्रह करने को बाध्य हैं कि राज्य सरकार द्वारा की गई एकतरफा और मनमानी फीस वृद्धि पर हस्तक्षेप करें, क्योंकि यह सीधे जीवन के अधिकार जैसी संवैधानिक गारंटी को प्रभावित करती है।”

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने आमतौर पर वकीलों की हड़तालों को न्यायिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक बताया है, लेकिन उसने यह भी माना है कि जब लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरा मंडराता हो, तो कुछ अपवाद हो सकते हैं। KHCAA ने तर्क दिया कि यह स्थिति एक ऐसा ही अपवाद है, क्योंकि यह करोड़ों नागरिकों को प्रभावित करती है, जिनमें से अधिकांश को इस वृद्धि के उनके कानूनी अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव का ज्ञान तक नहीं है।

संघ ने यह भी सुझाव दिया है कि 9 अप्रैल का दिन न्यायिक पीठों द्वारा आरक्षित फैसलों को लिखने और सुनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है, जिससे लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके। पत्र में कहा गया, “यह दिन न्यायालयों द्वारा न्यायिक निर्णयों के लेखन में उपयोग किया जा सकता है, जो लम्बे समय से प्रतीक्षित हैं।”

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इसके साथ ही, KHCAA ने इस फीस वृद्धि के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) भी दाखिल की है। आज हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह फीस वृद्धि के पीछे का तर्क और विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत करे। इससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका इस विवादास्पद मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभा रही है।

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