केरल हाईकोर्ट के जज द्वारा विधवा वकील पर की गई टिप्पणी के लिए वकीलों का विरोध, सार्वजनिक माफी की मांग  

केरल हाईकोर्ट में एक अभूतपूर्व घटना के तहत, वकीलों के एक समूह ने शुक्रवार को अदालत कक्ष में प्रदर्शन किया और एक जज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। जज पर आरोप है कि उन्होंने एक विधवा और अधिवक्ता, दिवंगत एलेक्स एम. स्कारिया की पत्नी, के प्रति असंवेदनशील टिप्पणी की थी। इस घटना के कारण कानूनी समुदाय में भारी असंतोष फैल गया है, और केरल हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA) इस मुद्दे पर जज की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।  

विवाद उस समय शुरू हुआ जब सुनवाई के दौरान विधवा अधिवक्ता ने अपने पति के निधन के कारण एक मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। KHCAA के अनुसार, जज की प्रतिक्रिया अपमानजनक थी, जिससे महिला बेहद आहत हुई और रोते हुए कोर्ट छोड़कर चली गईं।  

इस घटना के विरोध में शुक्रवार को वकील बड़ी संख्या में अदालत कक्ष में एकत्र हुए और कार्यवाही को बाधित कर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने जज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। KHCAA के अध्यक्ष नंदकुमार एम. आर. ने एसोसिएशन का पक्ष रखते हुए कहा कि माफी ओपन कोर्ट में मांगी जानी चाहिए, क्योंकि जज की चैंबर में दी गई निजी माफी इस मामले को हल करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।  

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एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जज सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो वे एक जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर संभावित कदमों पर चर्चा करेंगे, जिसमें अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने का निर्णय भी शामिल हो सकता है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज ने चैंबर में निजी रूप से माफी मांगने की इच्छा जताई है, लेकिन KHCAA ने इसे खारिज कर दिया है। इस विवाद के मद्देनजर, केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा एसोसिएशन के नेताओं से बातचीत करने की संभावना जताई जा रही है।  

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इस विवाद के बाद, संबंधित जज ने शुक्रवार को दिन के दूसरे सत्र में कार्यवाही नहीं की, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह मामला न्यायपालिका के लिए भी गंभीर बना हुआ है। इस घटना ने अदालतों में गरिमा, सम्मान और वकीलों के प्रति न्यायिक अधिकारियों के व्यवहार पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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