भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि बिना प्रत्यक्ष या पुष्ट प्रमाण के, योगदानात्मक लापरवाही (contributory negligence) को अनुमान के आधार पर नहीं माना जा सकता। यह फैसला प्रभावती एवं अन्य बनाम प्रबंध निदेशक, बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (सिविल अपील संख्या 3465-3466/2025) में सुनाया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक
