एक महत्वपूर्ण फैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए परियोजना ऋण लेने वाला उधारकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ‘उपभोक्ता’ की परिभाषा में नहीं आता है। यह फैसला मुख्य प्रबंधक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और अन्य बनाम मेसर्स एड ब्यूरो एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड और अन्य [सिविल अपील
