कैदियों के अधिकारों और न्याय तक पहुँच पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसले में, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी न्यायालय कानूनी कार्यवाही के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देने से मना नहीं कर सकता। यह निर्णय न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एम. जोतिरामन की खंडपीठ ने चेन्नई के पुझल में केंद्रीय कारागार-II
