भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुशासनात्मक कार्यवाही और आपराधिक मुकदमों के बीच के अंतर को दोहराया है, यह फैसला देते हुए कि आपराधिक मामले में बरी होने से अनुशासनात्मक कार्यवाही में कर्मचारी स्वतः दोषमुक्त नहीं हो जाता। यह अवलोकन महाप्रबंधक (कार्मिक), सिंडिकेट बैंक और अन्य बनाम बी.एस.एन. प्रसाद (सिविल अपील संख्या 6327/2024) में अपने फैसले
