वैवाहिक विवादों को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक फैसले में, कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्णकालिक व्यवसाय के रूप में बच्चों की देखभाल से जुड़ी गहन जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए एक महिला को उसके अलग हो चुके पति द्वारा दिए जाने वाले अंतरिम भरण-पोषण को दोगुना कर दिया। मामले की अध्यक्षता करते हुए, न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना
