केरल बार काउंसिल ने कानूनी शिक्षा विनियमन पर केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कि टिप्पणी की निंदा की

केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मोहम्मद मुस्ताक ने हाल ही में कानूनी शिक्षा के बीसीआई के विनियमन पर टिप्पणी की। इसके जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने रविवार को एक बयान जारी कर न्यायाधीश की टिप्पणी की निंदा की। यह भी कहा गया कि जस्टिस मुस्ताक को टिप्पणी करने से पहले अपना शोध करना चाहिए था।
यह सही है।

दरअसल, जस्टिस मोहम्मद मुस्ताक ने हाल ही में कहा था कि कानूनी शिक्षा में सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि बार काउंसिल के सदस्य कानूनी शिक्षा को निर्देशित करते हैं। वे देश के एलएलबी पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम भी निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ज्यादातर मुकदमेबाजी वकीलों से बने होते हैं जिनका ज्ञान ज्यादातर कानून के मुकदमेबाजी पक्ष तक सीमित होता है। यह बार काउंसिल के निर्धारित पाठ्यक्रम में परिलक्षित होता है।

बीसीआई ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर, बीसीआई ने इन दावों का खंडन किया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्वार्थी लोगों ने जज को गुमराह किया है। उन्हें उचित जानकारी के बिना किसी भी संस्था के बारे में नकारात्मक टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है।

उचित ज्ञान के बिना, टिप्पणी करने की कोई स्वतंत्रता नहीं है

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बीसीआई ने कहा कि वे मुस्ताक की टिप्पणी पढ़कर हैरान हैं। हालांकि मोहम्मद मुस्ताक केरल उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश हैं, उन्हें बार काउंसिल के कानूनी शिक्षा के विनियमन के बारे में पहले जानने के बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। चाहे वह एक न्यायाधीश ही क्यों न हो, बिना उचित जानकारी के उसे किसी के विरुद्ध कोई टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है।

कानूनी शिक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए एक अलग समिति

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बीसीआई के अनुसार, बार काउंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कानूनी शिक्षा के मुद्दों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है और उस समिति के केवल पांच सदस्य निर्वाचित सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश समिति की अध्यक्षता करते हैं। वहीं, उच्च न्यायालयों के दो वर्तमान मुख्य न्यायाधीश इसकी सह-अध्यक्षता करते हैं। उच्च न्यायालयों के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीश और 11 प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी हैं, जिनमें राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के डीन और अन्य सार्वजनिक और निजी कानून विश्वविद्यालयों के साथ-साथ देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।

यह उच्च स्तरीय समिति ही कानूनी शिक्षा नीतियों और मानकों पर निर्णय लेती है

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बीसीआई ने कहा कि माननीय न्यायाधीश को पता होना चाहिए कि बार काउंसिल की कानूनी शिक्षा समिति केवल 5 निर्वाचित सदस्यों से बनी है। केवल हीन भावना से ग्रसित लोग ही इस तरह के गैरजिम्मेदार बयान देते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि भारत में दुनिया में कानूनी शिक्षा का उच्चतम स्तर है।

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